बात बहुत छोटी पर जब-जब याद आये होठो पर मुस्कान खिल उठती है ।
हुआ यूँ बस का इन्तेजार करते हुए मैं बस स्टॉप पर खड़ी थी, तभी बस no 4 आकर खड़ी हो गयी जो लोग भी बस स्टॉप पर थे सब बस में चढ़ गए चूंकि मुझे बस no 8 से जाना था तो मैं बस स्टॉप पर ही खड़ी बस आने का इन्तेजार कर रही थी । तभी देखा, तो बस से थोड़ी दूर पर एक मोड़ से एक बुजुर्ग जो कुर्ता पजामा और पैरों में जूते पहने हुए थे ,हाथ मे नीले रंग का थैला लिए हुए, तेज तेज कदमों से चल रहे थे ,शायद उनके पैरों में तकलीफ थी इसलिए उनकी चाल में लड़खड़ापन था फिर भी चाल में तेजी थी और चेहरे पर बस न छूट जाने के चिंता के भाव । उन्हें देख मेने सोच लिया था कि अगर बस ड्राइवर ने बस शुरू की तो मैं रुकवा दूंगी पर मेरे सोचते-सोचते ही वो बस के पास पहुच गए और पहुचते ही उस सांवले, झुर्रियों वाले चेहरे पर खिली मुस्कान ने से छकाते वो टेढ़े मेढ़े दो दांत ऐसे झांकने लगे मानो सारे जहां की खुशी मिल गयी हो और उनकी वो सबसे क्यूट सी मुस्कान को देख मेरे चेहरे पर मुस्कान खिल उठी ...बहुत प्यारा एहसास था सुबह का। पूरा दिन उस मुस्कान से अब अच्छा बीतेगा। जानते है क्यों? क्योंकि एक छोटी सी खुशी जब खुद को इतना अच्छा एहसास देती है तो सोचो वो बिखरी मुस्कान न जाने कितने चेहरों को खिलाने की ताकत रखती है। यूँ ही मुस्कुराते रहिये और मुस्कान बिखराते रहिये...
Wednesday, April 24, 2019
छोटी सी मुस्कान
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कविता
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