मुसाफ़िरों के शहर में
हमसफ़र ढूढ़ने चला था
वो मेरा ही आईना था
जो मेरे अक्स से
रूठ के खड़ा था
जज़्बाती होकर
लिए थे कुछ फैसले
बिना तालिम
दिल आगे बढ़ चला था
मीरांत
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...