Showing posts with label #इश्क़ #ग़म #धोखा. Show all posts
Showing posts with label #इश्क़ #ग़म #धोखा. Show all posts

Tuesday, June 30, 2020

कविता

जिनके लिए उसने दहलीज़ तक नाक ली
देर से पता लगा वो इश्क़ नहीं दिल्लगी थी
दिल लगाने का सहारा थे हम तो बस
उनके निशानें पे तो कोई ओर ही खड़ी थी
जानते है ग़म नहीं होगा देखकर उन्हें मेरीहालत
खून से लथपथ चीरे मेरे दिल पर ही तो
 उन की आशिक़ी खड़ी थी
 समय बिताने का खिलौना थे हम तो
 तय मंज़िलों पर नये रिश्ते की सड़क
 पहले से ही पड़ी थी।
जाते हुये बस दुआ यही कर जाएंगे
रिश्तों की अहमियत भी हो तुझे
आखिर मेरे मरे प्यार की ज़मीनपे
तेरे नये रिश्ते की नींव जो पड़ी थी
 प्रियंका "Meeraant(मीरांत)"
30/6/20

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...