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Saturday, April 4, 2020

शायरी

सरपट रेल सी थी कुछ मुहब्बत उसकी
न आने का पता
न जाने का
पटरी सी मैं
बस थरथराती
रह गई।
प्रियंका श्री
5।4।20

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...