लिखने वालों की भी
अजीब दुनियां होती है
जहां न दुख ,न खुशी की
कमी होती है।
खुद से ही जुड़े होते है
खुद में ही सिमटे होते है
पर जब कलम
चलने को होती है।
तो उसमें कहानी भी
खुद से ज्यादा
औरों की होती है।
ये ऐसे इंसान होते है
जो भाव में निहित
होते है।
कहने वाले तो इन्हें
पागल भी कहते है,
पर ये ऐसे मानव है
जो दूसरों के दुख से
सीधे जुड़े होते है।
इसलिए तो लेखक एक
भावपूर्ण इंसान होते है।
~प्रियंका"श्री"
24/2/18
सार्थक रचना
ReplyDeleteये पर ये ऐसे मानव है
जो दूसरों के दुख से
सीधे जुड़े होते है।
बढिया
बहुत बहुत आभार सुधा जी
Deleteबहुत खूबसूरत रचना
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद सर्
Deleteबहुत बहुत धन्यवाद यशोदा जी
ReplyDelete"कहने वाले तो इन्हें
ReplyDeleteपागल भी कहते है,
पर ये ऐसे मानव है
जो दूसरों के दुख से
सीधे जुड़े होते है।"
लेखको के बारे मैं बहुत ही खूब्सूरती से बयान किया है आपने.....
धन्यवाद प्रिय
Deleteक्योंकि लेखक भी एक कलाकार होता है और कलाकार संवेदनशील व भावुक होते .
ReplyDeleteसही कहा प्रिय
ReplyDeleteमै पर पीड़ा मे अपनी पीडा
ReplyDeleteके कुछ शब्दो को लिखता हूँ
पीर परायी के संग अपने
शब्द गीत मै गाता हूँ
माँ वीणा के चरणो मे बस
अपना शीश झुकाता हूँ
जग की सारी पीड़ा ही मै
माँ को समर्पित करता हूँ
बहुत खूब आदरणीय
Deleteउत्कृष्ट रचना
ReplyDeleteधन्यवाद नीतू जी
Deleteसुंदर रचना,एक लेखक ही लेखक का मनोवैज्ञान समझ सकता है
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार आदरणीय।
Deleteलाजवाब रचना ....
ReplyDeleteसुन्दर सटीक....
वाह!!!
बहुत बहुत धन्यवाद सुधा जी
Deleteखग जानें खग की भाषा ।सुंदर रचना ।
ReplyDeleteसही कहा आपने।धन्यवाद पल्लवी जी
Deleteवाह क्या गहरे उतर कर एहसास लिखे है प्रियंका जी
ReplyDeleteशुक्रिया शुक्रिया 👏👏👏👏👏
बहुत बहुत आभार दी।
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