Tuesday, February 27, 2018

विचार

जब मन में भावों की
उथल पुथल मच जाये।
न बसे तब चैन मन में
बुद्धि भी काम न आये।
भटक भटक कर तन मन
जब थक जाये।
तो उस द्वार पर जाना
जहां हर बेचैन मन
को चैन।
हर भटकन को
एक साहिल मिल जाता है।
वो द्वार किसी और का नहीं
मेरे ईश्वर का कहलाता है।
                 प्रियंका श्री
                 2/2/18

11 comments:

  1. समर्पित भक्ति भाव।
    सुंदर शुभ

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  2. बहुत बहुत आभार यशोदा जी

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  3. ईश्वर का द्वार, उम्दा विचार....
    वाह!!!

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  4. सुंदर रचना। होली की अशेष शुभकामनाओं सहित बधाई।

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