जब मन में भावों की
उथल पुथल मच जाये।
न बसे तब चैन मन में
बुद्धि भी काम न आये।
भटक भटक कर तन मन
जब थक जाये।
तो उस द्वार पर जाना
जहां हर बेचैन मन
को चैन।
हर भटकन को
एक साहिल मिल जाता है।
वो द्वार किसी और का नहीं
मेरे ईश्वर का कहलाता है।
प्रियंका श्री
2/2/18
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कविता
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समर्पित भक्ति भाव।
ReplyDeleteसुंदर शुभ
बहुत बहुत धन्यवाद दी
Deleteबहुत बहुत आभार यशोदा जी
ReplyDeleteईश्वर का द्वार, उम्दा विचार....
ReplyDeleteवाह!!!
आभार सुधा जी
Deleteसुंदर रचना। होली की अशेष शुभकामनाओं सहित बधाई।
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार आदरणीय
DeleteAwesome
ReplyDeleteधन्यवाद योगेश जी
Deletebhut khoob priyanka ji,....
ReplyDeleteआभार कृष्ण कांत जी
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