जब जब सोचा
आखिरी है इम्तिहान अब ।
मुस्कुराकर मालिक ने कहा
खाली जो है बैठा
दिमाग उसका शैतान है
उठ चल ,
लगा दिमाग के घोड़े
कस ले चंचल मन को।
शुरू हो चुकी है
पास आ चुकी हर
एक घड़ी इम्तेहान है।
गिरती बिजली सी
चलती आंधी सी
गुम हो जाती रोशनी ।
लौटा कर लाना है
डूबते सूरज को
फिर उग आना है
प्रकृति नही मानती हार जब
तुमने फिर कैसे माना है
जिंदगी के संघर्षों को
तुम्हे ही तो अब हराना है।।
जीवन है तो सीखो इससे
सीख ,मन सबल बनेगा
थकना रुकना हिस्सा नहीं तेरा
चलते रहना दरिया से जाना है
HHossana(होसाना)
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