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Saturday, July 25, 2020

सकारात्मक सोच

हाल की परिस्थिति जैसी भी हो। आप जैसी भी राहों से गुजर रहे हो चाहे वे ऊबड़ खाबड़ हो , पथरीली हो, कंक्रीट हो या काटों से भरी हो जब भी ऐसी राहों से आप गुजरते है तो केवल दो ही सोच आपको सकारात्मक रख सकती है ।
1 भूत में गुजरा आपका सुखद वक़्त । जो हर चोट के वक़्त ,हर तकलीफ के दौरान जब भी याद आता है तो  होठों पर हल्की ही सही मुस्कान बिखेर देता है। 
2 भविष्य की ओर उठ रहे कदम अर्थात जो मंजिल तय की है उसे पाने की चाह में , उसको प्राप्त कर लेने पर होने वाली खुशी को आत्मसात करना । 
यही जीवन दर्शन है वर्तमान कैसा भी गुजर रहा हो अक्सर इंसान इन्ही दो के बीच फसा रहता है और लड़ता रहता है। बस स्वयं को सकारात्मक रखना ही आपको हर वो खुशी दे सकता है जिसकी चाह कर आप चल पड़ते है।~प्रियंका(meeraant)
              27/8/20

कविता

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