जिनके लिए उसने दहलीज़ तक नाक ली
देर से पता लगा वो इश्क़ नहीं दिल्लगी थी
दिल लगाने का सहारा थे हम तो बस
उनके निशानें पे तो कोई ओर ही खड़ी थी
जानते है ग़म नहीं होगा देखकर उन्हें मेरीहालत
खून से लथपथ चीरे मेरे दिल पर ही तो
उन की आशिक़ी खड़ी थी
समय बिताने का खिलौना थे हम तो
तय मंज़िलों पर नये रिश्ते की सड़क
पहले से ही पड़ी थी।
जाते हुये बस दुआ यही कर जाएंगे
रिश्तों की अहमियत भी हो तुझे
आखिर मेरे मरे प्यार की ज़मीनपे
तेरे नये रिश्ते की नींव जो पड़ी थी
प्रियंका "Meeraant(मीरांत)"
30/6/20
Bahut khub...
ReplyDeleteThank u bhabhi
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