उनकी महफ़िल में मैंने ,
कितनों को कहते सुना है ,
सियासत के बादशाह ,
वो खुद के हुनर से नही ,
वजीरों की खुशामदों से बने है।
मलाल नही है मुझे,
सोच पे उनकी जो ,
जीत न सके तो ,
अब अफवाहों का,
बाजार ही गर्म कर चले।
काश कुछ वक्त ,
सुकून से बैठ ,
गर सोच लेते ,
खुद के बारे में भी,
तो आज इंसान भी ,
वो बहुत खूब होते।
प्रियंका "श्री"
19/11/19