ऐसे ही एक छोटी सी बच्ची ने अपनी मासूमियत से ये मुझे सिखा दिया जिसे सीखना इस वक़्त मेरे लिए बहुत जरूरी था।
जिंदगी के इस मोड़ पर जब ख़ुद को हारा हुआ तो नहीं पर सबसे कम जरूर आँकना मैंने शुरू कर दिया था। उस वक़्त ये सीख मुझे जीवन को एक नए तरह से जीने में मदद जरूर करेगी।
फ्लोरिना उम्र में 6 से 10 साल तक की बच्ची सुपर डांसर चैप्टर 4 में आयी और सुपर 12 में सेलेक्ट भी हो गयी। जब जजेस द्वारा उसे चुना गया और मैडल और सर्टिफिकेट दिया गया तब उससे पूछा गया कि आप जानते हो आपके साथ क्या हुआ? आपको दिए इस मैडल और सर्टिफिकेएक मतलब क्या है?
जबाब सिर्फ यही मैंने डांस अच्छा किया इसलिए। क्योंकि उसकी कोई ख़ुद से या कार्यक्रम में चुनने को लेकर थी ही नहीं। उसे तो बस डांस करना था और अपना सौ प्रतिशत देना था।
वही बात म्यूजिक लेजेंडरी ए आर रहमान जी ने भी इंडियन आईडल के कार्यक्रम के दौरान कही कि जब उन्हें ऑस्कर के लिए चुना गया तब उन्हें चिंता इस बात की नहीं थी कि उन्हें ऑस्कर मिलेगा या नहीं बल्कि इस बात की थी कि वे सुर में गा पाएंगें या नहीं।
इन बातों से जाना कि जब हम अपने काम को व्यवसाय में बदल देते है तब उसकी आत्मा को मार देतेहै हमारा कर्तव्य सिर्फ अपने आपको और आपके कौशल को निखारना है न कि आगे बढ़ने की दौड़ में भागना।
जब आप सिर्फ अपने काम से प्यार करते है आपको सिर्फ वही करना है बिना किसी बात की चिंता के तब वह काम आपके लिए हार ,जीत, सम्मान ,अपमान और भी भावनायों से ऊपर उठ जाता है । वह काम सिर्फ आपको ख़ुशी और सुकून देने लगता है।
मुझे लिखना पसंद है पढ़ना पसंद है पर इन सब को मैं हमेशा एक स्ट्रेस के तौर पर लेती हूँ। जबकि इन कामों में मुझे सुकून मिलता है लिखते वक्त हमेशा दिमाग मे आता है मेरा लिखा पसंद आएगा या नहीं?
पर अब सोच ही बदल गयी। अब बस जो मुझे पसंद है वो करना है क्यों कर रही हूँ ये अब मेरे लिए मायने नही रखता। और आपके लिए भी नहीं रखना चाहिए।
बस आप अपना सौ प्रतिशत दीजिये ,पर भार समझ कर नहीं उससे प्यार करके । परिणाम से ज्यादा आपको करने में मज़ा आयेगा।
मीरांत