देखा था मैने उसे अपनी एक एक सांस के लिए लड़ते हुए। उस क्लिनिक में कैसा बदहवास होकर पड़ा हुआ था। कितनी चोटें थी उसके तन पर। उस लकड़ी के तख्ते नुमा बेड पर देखे थे मैने उसके घाव। जहां लगी थी कई मशीनें और ऑक्सीजन सिलेंडर । यह सब देख मेरा ह्रदय और तन का रोम रोम भयभीत होंचला था। डॉक्टर ने उसके मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा रखा था ताकि जी सके वो भी । जब जब इलाज के दौरान डॉक्टर अपनी हिम्मत हारता दिखता वो पूरी हिम्मत के साथ फिर से सांसे लेने लगता और यकीन दिलाता कि मैं जीना चाहता हूं । मुझे बचा लो। उस क्लिनिक में खड़ा हर व्यक्ति उसके जीने के जज्बे को देख कर एक उम्मीद से अपने इष्ट से प्रार्थना करने लगता । इसे इसका जीवन पुनः मिल जाने की।
अगर ये जीवन किसी इंसान का होता तो शायद कीमती भी होता पर एक पशु का था । एक सड़क पर घूमते आवारा कुत्ते का इसलिए शायद महत्वहीन था। तभी तो उसे सड़क पर किसी गाड़ी वाले के मारने के बाद उसे अस्पताल ले जाना भी ठीक नहीं समझा गया और उसे वही छोड़ आगे बड़ना सही लगा। न जाने कैसे उसने इतने दिन उन चोटों के साथ गुजारे । जब उसकी हालत ज्यादा बिगड़ी तब किसी पशुप्रेमी संस्था के पास खबर पहुंची और वे उसे डॉक्टर के पास ले आए ,पर शायद तब तक बात कुछ हद तक बिगड़ चुकी थी और जीने को लड़ता वह जानवर मौत के करीब था। मैं नहीं जानती कि वह जी गया या नहीं । फर्क क्या पड़ता है जी भी जाता तो फिर किसी और की गाड़ी का शिकार हो जाता।
आज भी उसकी वो हालत नही भूल पाती हूं जिस तरह उसे अपने जीवन के लिए लड़ते देखा । सकारात्मक रूप से यही सीखा कि हार मत मानो और यह की सबको जीने का अधिकार है वो भी जीव है आत्मा का वास उन में भी है बस हम सब जब मानवता ही भूल गए है तो क्या जीव क्या निर्जीव। सब एक समान। बस याद है तो स्वयं ।
HHossana(होसना)