Friday, December 1, 2017

मन उत्साहित कर जाये


मन उत्साहित कर जाये

चतुर्दिक बहती पवन
व्याप्त उसमे मीठी सुगंध     
छू जाए जब अन्तः करण   
मन उत्त्साहित कर जाये।

उदय दीवाकर पूरब से
छटा गुलाबी हल्की सी
क्षितिज भर में जो बिखराये।

देख अनुपम ये दृश्य
मन उत्साहित कर जाये।

पत्तों पर पड़ी ओस की बूदें
उन पर पड़तीं सूरज की किरणें
दल की जो कांति और बढ़ाये।

प्रत्येक दल की सुंदरता में
चार चांद लग जाये।

आकर्षण युक्त ,प्राकृतिक सौंदर्यता
मन उत्साहित कर जाये।

चांद की चांदनी में लिप्त
कलियों को निशा
जब खुद में समाये।

पड़ती सूरज की किरणों से
जब कली फूल बन जाये
देख ये अलोकिक परिवर्तन
मन उत्साहित कर जाये।।
                        ~प्रियंका"श्री"
                           1/12/17
                     








2 comments:

  1. प्राकृति के रंगों से सजी सुन्दर रचना ...
    सूरज की किरनें तो वैसे भी आशा और उमंग ले के आती हैं ...

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  2. जी सही कहा आपने सर्। बहुत बहुत आभार सर्

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