मन उत्साहित कर जाये
चतुर्दिक बहती पवन
व्याप्त उसमे मीठी सुगंध
छू जाए जब अन्तः करण
मन उत्त्साहित कर जाये।
उदय दीवाकर पूरब से
छटा गुलाबी हल्की सी
क्षितिज भर में जो बिखराये।
देख अनुपम ये दृश्य
मन उत्साहित कर जाये।
पत्तों पर पड़ी ओस की बूदें
उन पर पड़तीं सूरज की किरणें
दल की जो कांति और बढ़ाये।
प्रत्येक दल की सुंदरता में
चार चांद लग जाये।
आकर्षण युक्त ,प्राकृतिक सौंदर्यता
मन उत्साहित कर जाये।
चांद की चांदनी में लिप्त
कलियों को निशा
जब खुद में समाये।
पड़ती सूरज की किरणों से
जब कली फूल बन जाये
देख ये अलोकिक परिवर्तन
मन उत्साहित कर जाये।।
~प्रियंका"श्री"
1/12/17
प्राकृति के रंगों से सजी सुन्दर रचना ...
ReplyDeleteसूरज की किरनें तो वैसे भी आशा और उमंग ले के आती हैं ...
जी सही कहा आपने सर्। बहुत बहुत आभार सर्
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