खूबसूरत सा लम्हा अभी गुजरा था यहीं पर,
जब ख्वाबों में तुम्हें अपने करीब पाया था,
पाकर करीब, न जाने क्यूँ बन्द आंखे भी खुल गयी थी
और बिता वो लम्हा ,चेहरे की गुलाबी शर्म और होठों की हंसी से लिपट आया था।
कह गया था मुझसे मेरी ही कहानी जिसे रचा था मैंने मेरे ही मन मंदिर में।
~प्रियंका"श्री"
2/2/18
Thursday, February 8, 2018
खूबसूरत सा लम्हा
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कविता
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