एक हसीन पल था,
जिसे उस वक़्त से,
चुराया था मैंने,
जिस वक्त ने ,
जीना सिखाया था मुझे।
उस वक़्त के,
न जाने कितनें पलों को ,
समेट कर रखा था
मैंने , कुछ इस तरह,
मानो ,उन चित्रों को अपने ह्रदय
में चित्रित कर रखा हो मैंने।
जब-जब वो चित्र मेरी,
आंखों के समझ आते थे,
दिल में खुशी,
आंखों में नमी दे जाते थे,
वो हर पल अनमोल था,
मेरे लिए ,जो मुझे सदा,
मेरा अपना गुजरा हुया,
कल दिखलाते थे।
उन पलों को जिया था मैंने,
उन पलों से सीखा था मैंने,
मेरे आने वाले कल का आधार
थे ,वो पल
इसलिए मुझे बहुत खास थे, वो पल।
प्रियंका "श्री"
7/3/18
सुंदर.
ReplyDeleteबहुत सुंदर आदरणिया अनुजा
ReplyDeleteधन्यवाद रंगराज जी
ReplyDeleteआभार आदरणीय
ReplyDeleteदिल को छूती रचना
ReplyDeleteकोमल भाव लिये सुंदर यादों का सफर।
बेहतरीन।