सद्गुरु दे हमकों गुरुवाणी
हम भी बैठे सुनते हैं
ज्ञान कहाँ से आये हृदय में
जब हृदय में अवगुण बसते हैं
न सार्थ हो गुरुवाणी का
न सार्थ हो ऐसे सत्संग का
जहां बैठ सुनता हर कोई
अमल नहीं पर करते हैं
प्रियंका"श्री"
11/4/18
वाह!!!
ReplyDeleteक्या बात है...
अवगुण बसे हृदय में ज्ञान कहाँ से आये
बहुत सुन्दर
बहुत बहुत आभार सुधा जी
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