आज़ादी हर देश ,हर राज्य, हर व्यक्ति के लिए सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि इसका एक ख़ास मतलब होता है।
जो उसके मूल आधार से, मूल सुविधाओं से, उसके मूल अस्तित्व से जुड़ा होता है। आज़ादी चाहे विचारों की हो, व्यक्तिगत हो, सार्वजनिक हो चाहता इसे हर कोई है। और हर एक के लिए इसका मतलब भी अलग -अलग होता है। घर की चार दीवारों में बन्द व्यक्ति की आज़ादी उसका खुला आसमान है, दो वक़्त की रोटी पाने वाले के लिए आज़ादी शोषण से मुक्ति है, तो वही किसी के लिए आज़ादी समाज की कुरूतियों से मुक्ति है।
आज़ादी पशु ,इंसान ,पेड़ पौधों हर किसी को अपने रूप में अपनी सीमाओं के अंदर हर कोई चाहता है।
अगर बात इस वर्ष की आज़ादी की करें तो हर इंसान अभी सिर्फ इस वायरस से आज़ादी चाहता है ताकि फिर से वो वही जिंदगी जी सके जिसे वो जीता आया है । और कहीं न कहीं इस महामारी के समय ने हम सब को आज़ादी का असल मतलब भी सीखा दिया है।
और ये भी कि हमारे देश के लिए आज़ादी अभी भी बाकी है। उस सोच की बेड़ियों से जो देश के इतिहास से चलती आयी है
हमारे धर्म,जाति और समुदाय को लेकर। इन बेड़ियों से आज़ादी की जरूरत है अब हमें । और क्यों न होगी क्योंकि न जाने कितने रहमान, सलीम, अख्तर , राम , मनोज , पवन, इन बेड़ियों की जंजीरों में बंध जाते है और अपने जैसे न जाने कितनों को नुकसान पहुँचा जाते है।
आज़ादी मजदूरों को चाहिए अपनी परिस्थितियों से जिन्होंने उनको ऐसे समय घर से बेघर कर दिया , उनको दाने दाने के लिए मजबूर कर दिया।रोटी, कपड़ा, और मकान के कमी की आज़ादी।
आज़ादी चाहिए हर उस छोटी बच्ची को , औरत को ,लड़की को जो घर से बाहर निकलते ही डर में रहती है । उसके शरीर को ताकती आँखों से, उसके जिस्म को छूते हाथों से, उसके पहनावे और उसके शरीर के अंग पर कसते क़सीदों से , उसके साथ होते अत्याचारों से , उसको इंसान न मानने वाली सोच से।
आज़ादी चाहिए आज हर उस इंसान को जो अपने लिए अपने देश के लिए बहुत कुछ करना चाहता है पर इस सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार से टूट कर बिखर जाता है।
आजादी चाहिए हर उस युवा को जो अपनी सही सोच को पंख देना चाहता है पर गला घोटती रीतियों में कहीं मर जाता है।
आज़ादी चाहिए इस पर्यावरण को हम सब से जो इसे मिटाने पर तुले है।
हर साल हम आज़ादी की खुशियाँ मनाते है। इतनी सारी बंदिशों के बाबजूद । क्योंकि हम बदलना जानते है। हम सकारात्मक होना जानते है । हम लड़ना जानते है। हम टूटकर बनना जानते है। हम जानते है वो सब जो देश के हित में है। जो हमारे अपनों के हित में है जो अपने हित में है।
पर एक बात हमेशा ध्यान रहे आज़ादी का मतलब किसी को नुकसान पहुँचाना , उसे कष्ट देना, उसके हितों को समाप्त करना , उसकी सुख शान्ति को नष्ट करना नहीं होना चाहिए।
क्यों न इस साल से हर साल आज़ादी पर हम सब मिलकर एक एक अपने अंदर की कमी जो किसी दूसरे की आज़ादी को खत्म कर रही है उसे मिटाने की कसम खाये ।~meeraant(मीरांत)
15/8/20
स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को शुभकामनाएं।