कहानियां कभी काल्पनिक तो कभी वास्तविकता पर आधारित, इन सब के बीच अगर कभी ध्यान गया है उसके अंत पर ,तो अक्सर अधिकतर कहानियों का अंत सकारात्मक ही होता है। और कुछ का नकारात्मक ।
इस कथन को अगर ध्यान से देखे और थोड़ा सोचे । तब क्यूँ? का जबाब मिल जाएगा।
हर कहानी कई उतार चढ़ाव के बीच बुनी होती है । जिसमें अनेक रस, भाव सब ऐसे पुल से गुजरते है जो कभी तो अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्शाता है तो कभी उजाड़, कमज़ोर , जिसका टूटना तय है।
और इन्ही सब के बीच फंसा पाठक मन की नाव में भाव रूपी समुंदर में डोलता रहता है।
ऐसे में यदि कहानी का अंत दर्दनाक होता है तो मन रूपी नाव भावों के समुंदर से कभी पार नहीं लग पाती और कहानी और पाठक एक मजबूत बन्धन में बंध जाता है।
यदि कहानी का अंत सकारात्मक हुआ तब कहानी का मुख्य क़िरदार प्रफुल्लित हो उठता है और उसके साथ ही कहानी के पाठक के मुख पर भी ख़ुशी ज़ाहिर हो उठती है। और पाठक निश्चिंत हो जाता है। बिना मन को दर्द दिए।
इन्ही कहानियों जैसे जिंदगी में भी नए किरदारों का आना-जाना लगा रहता है
अगर उनका जाना भी एक सकारात्मक पथ पर हो तो सब ख़ुश।
वही जाना कुछ सवालों के साथ ख़त्म हो तो ज़िंदगी भर का बंधन, उन सवालों के जबाब के रूप में, जिंदगी भर की निराशा के साथ।~ meeraant(मीरांत)
28/8/20
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