Sunday, May 9, 2021

अम्मी कहती है

अम्मी कहती थी हारना नहीं तुझे
लाडली है मेरी लड़ना होगा तुझे
चाहे जैसी भी परिस्थितियां आये
चाहे जैसे सवाल आये
हर सवाल का उत्तर है यहां
बस जरा सा हिम्मत रख
उस ताले की भी चाबी है
बस गुच्छे  पर सही नज़र रख
क्यों टूटना क्यों बिखरना
जब संभलना भी खुद है तुझे
देख उस बादल को
टिमटिमाता है जो तारों से
हर तारा चमकदार है
बस एक तारा जो हार गया
गिर जाता है उस गगन अपार
फिर भी न चमक है रुकती
इस आसमान की
टूटना नही है किस्मत तेरी
थोड़ा सा साहस और
 होगी दुनियां तेरी।~मीरान्त

13 comments:

  1. Bahut bahut shurkiya anita ji....apka msg ate hi aur achcha likhane ke liye motivate ho jati hu...

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  2. एक-एक पंक्ति प्रेरणादायी है। किसी एक पंक्ति को चुनकर मैं नही कह सकता की कि यह आपकी रचना की बेहतरीन पंक्ति है...बल्कि सभी पंक्तियाँ माँ की तरह सशक्त एवं ममतामयी है। सबका अपना अस्तित्व है....और हर एक पंक्ति प्रोत्साहित कर रही है, दुख के क्षण नहीं टूटने के लिए। अद्भुत है रचना।

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    1. Shukriya prakash ji ....बस लिखने वाले कि उम्मीद यही होती है कि सही समय पर पढ़ने वाले के अंदर वो भाव भर सके जिस उद्देश्य से लिखी गयी है

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  3. बहुत सुंदर प्रेरक माँ की सीख जो निराशा में आशा भर दें।
    सुंदर सृजन।

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    1. बहुत बहुत आभार ।

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  4. बहुत खूब ल‍िखा मीरान्त जी, हर सवाल का उत्तर है यहां
    बस जरा सा हिम्मत रख
    उस ताले की भी चाबी है
    बस गुच्छे पर सही नज़र रख...सुंदर रचना

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    1. बहुत बहुत आभार मैम। आपको अच्छी लगी उसके लिए शुक्रिया।

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  5. अति सुन्दर अभिव्यक्ति ।

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    1. बहुत बहुत आभार अमृता मैम।

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  6. बेहद खूबसूरत रचना

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  7. बहुत बहुत आभार मैम

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  8. प्रेरणादायक कविता

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    1. शुक्रिया प्रीति जी

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