अम्मी कहती थी हारना नहीं तुझे
लाडली है मेरी लड़ना होगा तुझे
चाहे जैसी भी परिस्थितियां आये
चाहे जैसे सवाल आये
हर सवाल का उत्तर है यहां
बस जरा सा हिम्मत रख
उस ताले की भी चाबी है
बस गुच्छे पर सही नज़र रख
क्यों टूटना क्यों बिखरना
जब संभलना भी खुद है तुझे
देख उस बादल को
टिमटिमाता है जो तारों से
हर तारा चमकदार है
बस एक तारा जो हार गया
गिर जाता है उस गगन अपार
फिर भी न चमक है रुकती
इस आसमान की
टूटना नही है किस्मत तेरी
थोड़ा सा साहस और
होगी दुनियां तेरी।~मीरान्त
Bahut bahut shurkiya anita ji....apka msg ate hi aur achcha likhane ke liye motivate ho jati hu...
ReplyDeleteएक-एक पंक्ति प्रेरणादायी है। किसी एक पंक्ति को चुनकर मैं नही कह सकता की कि यह आपकी रचना की बेहतरीन पंक्ति है...बल्कि सभी पंक्तियाँ माँ की तरह सशक्त एवं ममतामयी है। सबका अपना अस्तित्व है....और हर एक पंक्ति प्रोत्साहित कर रही है, दुख के क्षण नहीं टूटने के लिए। अद्भुत है रचना।
ReplyDeleteShukriya prakash ji ....बस लिखने वाले कि उम्मीद यही होती है कि सही समय पर पढ़ने वाले के अंदर वो भाव भर सके जिस उद्देश्य से लिखी गयी है
Deleteबहुत सुंदर प्रेरक माँ की सीख जो निराशा में आशा भर दें।
ReplyDeleteसुंदर सृजन।
बहुत बहुत आभार ।
Deleteबहुत खूब लिखा मीरान्त जी, हर सवाल का उत्तर है यहां
ReplyDeleteबस जरा सा हिम्मत रख
उस ताले की भी चाबी है
बस गुच्छे पर सही नज़र रख...सुंदर रचना
बहुत बहुत आभार मैम। आपको अच्छी लगी उसके लिए शुक्रिया।
Deleteअति सुन्दर अभिव्यक्ति ।
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार अमृता मैम।
Deleteबेहद खूबसूरत रचना
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार मैम
ReplyDeleteप्रेरणादायक कविता
ReplyDeleteशुक्रिया प्रीति जी
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