Thursday, July 1, 2021

शायरी

चले थे काफ़िले के साथ मगर
जब थमे तो अकेले ही थमे
~मीरान्त

shayari

ग़म के उन लम्हों को ज़ुदा कर
लौट आना फिर उसी सुकून में
काश आसान हो जाता ये उतना ही
जितना आसान बारिश की बूंदों का ज़मीन पर आना।
~मीरान्त

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...