ग़म के उन लम्हों को ज़ुदा कर
लौट आना फिर उसी सुकून में
काश आसान हो जाता ये उतना ही
जितना आसान बारिश की बूंदों का ज़मीन पर आना।
~मीरान्त
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
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