बात बहुत छोटी पर जब-जब याद आये होठो पर मुस्कान खिल उठती है ।
हुआ यूँ बस का इन्तेजार करते हुए मैं बस स्टॉप पर खड़ी थी, तभी बस no 4 आकर खड़ी हो गयी जो लोग भी बस स्टॉप पर थे सब बस में चढ़ गए चूंकि मुझे बस no 8 से जाना था तो मैं बस स्टॉप पर ही खड़ी बस आने का इन्तेजार कर रही थी । तभी देखा, तो बस से थोड़ी दूर पर एक मोड़ से एक बुजुर्ग जो कुर्ता पजामा और पैरों में जूते पहने हुए थे ,हाथ मे नीले रंग का थैला लिए हुए, तेज तेज कदमों से चल रहे थे ,शायद उनके पैरों में तकलीफ थी इसलिए उनकी चाल में लड़खड़ापन था फिर भी चाल में तेजी थी और चेहरे पर बस न छूट जाने के चिंता के भाव । उन्हें देख मेने सोच लिया था कि अगर बस ड्राइवर ने बस शुरू की तो मैं रुकवा दूंगी पर मेरे सोचते-सोचते ही वो बस के पास पहुच गए और पहुचते ही उस सांवले, झुर्रियों वाले चेहरे पर खिली मुस्कान ने से छकाते वो टेढ़े मेढ़े दो दांत ऐसे झांकने लगे मानो सारे जहां की खुशी मिल गयी हो और उनकी वो सबसे क्यूट सी मुस्कान को देख मेरे चेहरे पर मुस्कान खिल उठी ...बहुत प्यारा एहसास था सुबह का। पूरा दिन उस मुस्कान से अब अच्छा बीतेगा। जानते है क्यों? क्योंकि एक छोटी सी खुशी जब खुद को इतना अच्छा एहसास देती है तो सोचो वो बिखरी मुस्कान न जाने कितने चेहरों को खिलाने की ताकत रखती है। यूँ ही मुस्कुराते रहिये और मुस्कान बिखराते रहिये...
Wednesday, April 24, 2019
छोटी सी मुस्कान
Tuesday, March 26, 2019
विचार
सत्ता का लोभ जानना है तो राजनीति से बेहतर कुछ नही
मेरी इस बात से सहमत तो सभी होंगे
वैसे राजनीति से तालुक्क रखने वालों के लिए जितना जरूरी चुनाव के वक़्त वोटर होता है उझसे जरूरी कुछ नही
ये बात ऐसे ही कहि जा सकती अब खुद ही देखिए जब भी चुनाव का आगमन होता है न जाने कितने वादे , कितनी योजनाए , कितने हथकंडे सुनने में आते है जैसे
20 प्रतिशत गरीबों को सालाना 72000 रुपये देने का वादा,
किसानों की कर्जमाफी फलाना फलाना।
ये वादे सुनने में जितने लुभावने लगते है न उतने की कहने में भी
पर जब इनको जमीनी हकीकत पर उतारा जाता है इनकी असलियत तो सामने तभी आती है कि कितने वादों में ईमादारी बरती गई ,कितनो को किताबों में चढ़ाने वाला तथ्य ही बनाया गया।
अब बेचारी जनता भी क्या करे जब वास्तविक मुद्दों पर बात नही कर सकते क्योंकि उन पर अब तक कह कर तो कुछ हुआ नही तो क्यों न अब रेगिस्तान की मरीचिका को ही हथियार बनाया जाए।
इन सब के बीच देखना सिर्फ ये है कि आज की युवा पीढ़ी जो पढ़ीलिखी है भावनात्मक तौर पर काम बल्कि प्रायोगिक तौर पर ज्यादा सोचती है और उसे हर वादे का हर योजना का क्रियात्मक स्वरूप देखना है ,इन सब के बीच कौन अपनी कितनी जुमलेबाजी में आगे निकल
पाता है ये तो चुनाव के परिणाम और भारत की जनता ही तय करेगी ।जब तक मनोरंजन स्वरूप ही ऐसे भाषणों का लुफ्त उठाते रहे।
Saturday, December 29, 2018
थोड़ा सा विश्वास
जो लिखा है तेरी किस्मत में,
वो देगा जरूर तुझे।
कर यक़ीन बस,
उस पर इतना।
छोड़ सब चिंताएँ
उस पे।
दर पे आये ,उसके जो
हाथ खाली न जाने देता ।
कभी किसी को
देर भली,
किसी को जल्दी है मिलता।
कितना किसको मिलना है,
ये तो उसका कर्म भाग्य कहे।
देता है वो, गर रख यकीन जो
बस इतना उस पर विश्वास करें
प्रियंका"श्री"
29/12/18
Wednesday, September 12, 2018
तीज की शुभकामनाएं
हाथों में डाल लाल चूड़ीयाँ,
मांग में भर लाल सिंदूर,
ओढ़ लाल चुनर सिर से,
मांगती हूँ वादा तुझसे ,
साथ सात जन्मों का ,
वर यही मांगू प्रभु से,
सजती रहूँ यूँ ही हर तीज पे।
प्रियंका"श्री"
12/9/18
तीज का व्रत करने वाली सभी महिलाओं को बहुत बहुत शुभकामनाएं.....
Sunday, September 9, 2018
शायरी
कुछ पल फुर्सत से बैठ लिया जाए
सबसे तो मिल लिए,चलो अब खुद से
मिल लिया जाए।
प्रियंका"श्री"
10/9/18
Thursday, August 30, 2018
न जाने क्यों?...
न जाने क्यों?,कैसे ?,चुने थे वो रास्ते,
जिन्हें कहते थे गलत सभी,
वो मासूमियत थी या थी कोई खता ,
जो बढ़ चले थे कदम जहां ,
न जाने क्या कशिश थी वहां,
जो न देख सके काँटों का ज़हान,
चलते चले ,सहते रहे ,गम ए दर्द
जिंदगी का,
मगर न थम सके उन कदमों के निशान,
एहसास ही न हुया की रास्ते गलत थे ,
कदमों के निशान जिनपे चिन्हित हो चले थे,
जब अनुभवों ने अपना जाल बिछाया,
सही गलत का फर्क समझाया,
अचेतन मन मे चेतना का आलोक
जलाया,
सही राह से अवगत कराया,
ये तू ही है जो सदा से मेरे मन मे समाया,
मेरे ईश्वर ने आज मुझे ,
सही मार्गर्दर्शन दिखलाया।
प्रियंका"श्री"
29/8/18
Friday, August 17, 2018
शायरी
कई आशियानें बदलें हमनें तेरी एक तलाश में
अब जब तू मिला है तो दिल को चैन नही है
प्रियंका"श्री"
17/8/18
कविता
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
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लिखने वालों की भी अजीब दुनियां होती है जहां न दुख ,न खुशी की कमी होती है। खुद से ही जुड़े होते है खुद में ही सिमटे होते है पर जब कलम च...
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मैंने रिश्तों को बदलते देखा है मजबूरी से नहीं, जरुरतों के अनुरूप ढ़लते देखा है मैंने रिश्तों को बदलते देखा है। पहले गैरों और अपनों में एक...
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जिंदगी में मुश्किलें कई हो, रास्तों पर अड़चने कई हो, डर कर रुक जाना ये तू नही है डर कर मर जाना ये तू नही है मंजिले दूर सही , चलकर आधे रास्ते ...