जब सिर्फ साँसों पर चलती है जिंदगी
मौत से बत्तर होती है जिंदगी
न उमंग ,न तरंग
न किसी को पाने की चाहत
न किसी को खोने का गम
बस बिना वज़ह बढ़ती है जिंदगी
मौत से बत्तर होती है जिंदगी।।
सुख दुख उस पल एक समान होते है
न कोई अहसास,
न कोई भाव होते है
चिंताओं से ग्रसित हम बेजान होते है
बिना मंज़िल के रास्तों पर बढ़ती जाती हैजिंदगी
मौत से बत्तर हो जाती है जिंदगी।।
दो पल भी न ठहरती है
न कुछ कहती ,न सुनती है
बस बेजान ख़्वाब सा छोड़ जाती है जिंदगी
मौत से बत्तर हो जाती है जिंदगी।।
मन के उच्छवास कैनवास पर उकेर दिए हो जैसे...
ReplyDelete👌👌
Ek chhoti koshish... Aabhar purushottam ji
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