लौट आओ माँ
मां जब भी
याद आती है तुम्हारी
आंखों में आँशु आ जाते है
वो वक्त याद आ जाता है
जब कभी साथ होता था तुम्हारा
मन बेचैन हो उठता है
आंखे तलाशने लगती है
तुम्हारे एक अहसास को
पाने को मन मचल उठता है
हर जगह ढूढता हु तुम्हे
न पाकर फिर मुरझा जाता हु
पर तुम भी तो मां हो
न होते हुए भी
एहसास जान लेती हो
ठंडी हवा के झोंके से
अपने आँचल में समा लेती हो
कर देती हो दूर
मेरे अंदर की बेचैनी
दे देती हो सहारा मुझे
उस वक़्त पास न होकर भी
पास पाता हु तुम्हे
काश वो पल न आया होता
तो आज पास होती मां मेरे
तुम्हारा साथ होता
याद न होती साथ मेरे
संभव हो तो लौट आओ मां
तरसता तू प्यार को तेरे।।
~प्रियंका~"श्री"
5/10/17
अंतेर्मन को छू जाने वाली अभिव्यक्ति है..
ReplyDeleteधन्यवाद सौरभ जी
Deleteबहुत सुंदर. सब के दिलों में एक सी अनुभूति होती है मां के लिये.
ReplyDeleteधन्यवाद अपर्णा जी..
Deleteधन्यवाद अपर्णा जी..
DeleteBeautiful
ReplyDeleteधन्यवाद छुटकी
Deleteधन्यवाद छुटकी
DeleteBeautiful
ReplyDeleteमाँ, शब्द ही एक सुखद अनुभूति है।
ReplyDeleteमम्मी की याद दिला दी आप ने ...जो छोड़ गई थी मुझे चौदह वर्ष की उम्र में
ReplyDeleteमुझे क्षमा कीजिये। कि मेरी बजह से आपकी आँखों मे अगर आँसू आये हो।
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