Thursday, October 5, 2017

लौट आओ माँ

लौट आओ माँ

मां जब भी
याद आती है तुम्हारी
आंखों में आँशु आ जाते है

वो वक्त याद आ जाता है
जब कभी साथ होता था तुम्हारा
मन बेचैन हो उठता है
आंखे तलाशने लगती है

तुम्हारे एक अहसास को
पाने को मन मचल उठता है
हर जगह ढूढता हु तुम्हे
न पाकर फिर मुरझा जाता हु

पर तुम भी तो मां हो
न होते हुए भी
एहसास जान लेती हो
ठंडी हवा के झोंके से
अपने आँचल में समा लेती हो

कर देती हो दूर
मेरे अंदर की बेचैनी
दे देती हो सहारा मुझे

उस वक़्त पास न होकर भी
पास पाता हु तुम्हे

काश वो पल न आया होता
तो आज पास होती मां मेरे
तुम्हारा साथ होता
याद न होती साथ मेरे
संभव हो तो लौट आओ मां
तरसता तू प्यार को तेरे।।

                 ~प्रियंका~"श्री"
                   5/10/17

12 comments:

  1. अंतेर्मन को छू जाने वाली अभिव्यक्ति है..

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  2. बहुत सुंदर. सब के दिलों में एक सी अनुभूति होती है मां के लिये.

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  3. माँ, शब्द ही एक सुखद अनुभूति है।

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  4. मम्मी की याद दिला दी आप ने ...जो छोड़ गई थी मुझे चौदह वर्ष की उम्र में

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    1. मुझे क्षमा कीजिये। कि मेरी बजह से आपकी आँखों मे अगर आँसू आये हो।

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