Thursday, October 5, 2017

मन की बात

आज फिर उसने बोला मुझे स्कूल नही जाना ।आपकी याद आएंगी, उसकी ये बात मन में मेरे कई तरह के भाव जगा देती ।एक तरफ जहां मन खुश होता कि मेरी बेटी मुझे इतना प्यार करती है ।वही दूसरी तरफ दुखी होने लगता कि मेरा लाड दुलार कही उसकी आगे आने वाली जिंदगी में रुकावट न बन जाये। फिर सोचती कही स्कूल में उसे कोई परेशानी तो नही ।हजारो तरह के ख्याल मन मे आते । पर सब को एक तरफ कर उसे समझाती ,उससे पूछती ,कुछ अपने मन को ,तो कुछ उसके मन को हल्का करती। और उसे स्कूल भेजने के लिए गेट तक जाती ।पर हद तो जब होती ,जब बो मुझे देखे बिना ,मुझसे टाटा किये बगैर ही स्कूल के लिए अपनी बस में बैठ चली जाती ।उस वक़्त मन अंदर से टूट जाता ।रोने के अलावा कुछ नही आता समझ मे। ओर पूरा दिन इसी चिंता मैं जाता, मेरी बेटी ठीक होगी न , कही रो न रही हो ।अपनी काम बाली का दिमाग कहकह कर खा जाती । बस यही बात पूछती रहती ,वो ठीक होगी न , ऐसा क्यों करती है कही में उसे ज्यादा लाड प्यार तो नही कर रही ।अपने पति को कॉल करके परेशान करती ।उसके बारे में बार बार प्रश्न पूछती ओर चाहती कि सब उत्तर भी वैसा ही दे जैसा मन चाहे। मैं जानती हूं मेरा ऐसे करने की एक वजह ये भी है कि कुछ समय बाद जब वह अपने हर छोटे बड़े काम के लिए मुझ पर आश्रित नही होगी तो मेरा जीवन कैसा होगा। शायद यही सोच मुझे अभी उसके साथ उसका हर पल जीने को मजबूर करती है ।पर एक माँ होने के नाते मुझे अपनी सीमाएं भी बाधिनी होगी ताकि मेरा बच्चा मेरे सानिध्य में अपनी जिंदगी अपनी तरह से जीना भूल न जाये क्योंकि कहते है ना ,जब तक बड़े होते है बच्चे अपनी गलतियों से या अपने खुद से कुछ नही सीखते ।मैं नही चाहती उससे कोई गलती हो। पर हा उसे सीखने के लिए ,करना तो होगा क्योंकि बिना किये कुछ नही मिलता हां कभी कभी लगता है हम माये थोड़ी सी मतलबी तो होती है अपने बच्चो के लिए । पर जब बात उनके भविष्य की हो तो भी हम हर तरह सोचने को ,करने को भी तैयार हो जाती है।।
                                         ~प्रियंका~"श्री"
                                             5/10/17

1 comment:

  1. बहुत सही, सार्थक और दूरदर्शिता से परिपूर्ण रचना!! बधाई!!!

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