Friday, October 6, 2017

मां बनने का अहसास

वो पता चलना
तुम्हारे आने का
गुदगुदा गया दिल को
बड़ा गयी थी
धड़कने दिल की
भर गई थी आँखें
खुशी के आँसूओ से
बदलने जो वाली
थी जिंदगी मेरी
वक्त दर वक्त जब
अहसास हुआ मुझे
तुम्हारी पहली छुअन का
कही न कही
धबरा गयी थी मैं
अनुभव था पहला मेरा
समझ भी छोटी थी
बस चाह बड़ी लिए
सब सह रही थी मैं
मेरा मातृत्व सच्चा था
न जाने क्यों बताने
को मचल रही थी मैं
वक्त वो जब आया
हर दर्द सह कर
तुम्हे अस्तित्व में
जब पाया।
न थमे आंखों से आँसू
न गयी होटो से मुस्कुराहट
जब लिया था गोद मे
पहली बार तुम्हे
खुद से ही डर गई थी मैं
डर था । न कोई
तकलीफ दे दु तुम्हे
आख़िर मां जो बन गयी थी मैं।।
                         ~प्रियंका~"श्री"
                           6/10/17
                              23:43 pm

13 comments:

  1. जब लिया था गोद मे
    पहली बार तुम्हे
    खुद से ही डर गई थी मैं
    डर था । न कोई
    तकलीफ दे दु तुम्हे
    आख़िर मां जो बन गयी थी मैं।
    very nice poetry

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  2. मातृत्व की प्राप्ति किसी भी सुहागण का सबसे सुखद एहसास है जब एकसाथ असंख्य एहसास गर्भ की पीड़ा के साथ जन्म ले रहे होते हैं। डर,भय,संशय,पीड़ा के साथ मातृत्व जग उठता है छलक पड़ता है आँखों मे आँसू, सीने में स्वतः दूध उतर आता है। माँ कहलाती है वो।
    बहुत ही सुंदर रचना प्रियंका श्री जी।

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    1. बहुत बहुत आभार पुरुषोत्तम जी।

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  3. सुप्रभात,
    मां बनने का अहसास अत्यंत ही खास एवं रोमांचकारी होता है.. अपने अजन्मे शिशु के जन्म को लेकर बहुत सारी आशंकाएं, भयमिश्रित आनंद दिनों-दिन बढ़ते अपने उदर की आकार वृद्धि एक अलग ही रोमांच से भर देती है,
    आपने अपनी शब्दों के दृष्टिकोण से बहुत ही प्यारी रचना लिखी,एक मां और शिशु के मध्य नौ महीने के संवाद को रचा.. आंनद विभोर हो उठा मन.. शुभकामनाएं एवं शुभ दिवस..!!

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    1. शुभ दिवस अनीता जी। बहुत बहुत आभार।

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  4. सुन्दर भाव। टंकण अशुद्धियों पर ध्यान दें ।आशुयों को आँसुओं आँशु को आँसू कर लें ।

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    1. आभार जोशी जी। जी बिल्कुल आपकी बात पर पूर्ण ध्यान दूंगी।

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  5. बहुत बहुत धन्यवाद यसोदा जी।

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  6. बहुत ही सुन्दर मनभावन एहसास....

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  7. मातृत्व का अहसास कराती हुई आपकी यह ममता भरी रचना

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    1. बहुत बहुत आभार शकुंतला जी।

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