वो पता चलना
तुम्हारे आने का
तुम्हारे आने का
गुदगुदा गया दिल को
बड़ा गयी थी
धड़कने दिल की
बड़ा गयी थी
धड़कने दिल की
भर गई थी आँखें
खुशी के आँसूओ से
बदलने जो वाली
थी जिंदगी मेरी
खुशी के आँसूओ से
बदलने जो वाली
थी जिंदगी मेरी
वक्त दर वक्त जब
अहसास हुआ मुझे
तुम्हारी पहली छुअन का
कही न कही
धबरा गयी थी मैं
अहसास हुआ मुझे
तुम्हारी पहली छुअन का
कही न कही
धबरा गयी थी मैं
अनुभव था पहला मेरा
समझ भी छोटी थी
बस चाह बड़ी लिए
सब सह रही थी मैं
समझ भी छोटी थी
बस चाह बड़ी लिए
सब सह रही थी मैं
मेरा मातृत्व सच्चा था
न जाने क्यों बताने
को मचल रही थी मैं
न जाने क्यों बताने
को मचल रही थी मैं
वक्त वो जब आया
हर दर्द सह कर
तुम्हे अस्तित्व में
जब पाया।
न थमे आंखों से आँसू
न गयी होटो से मुस्कुराहट
हर दर्द सह कर
तुम्हे अस्तित्व में
जब पाया।
न थमे आंखों से आँसू
न गयी होटो से मुस्कुराहट
जब लिया था गोद मे
पहली बार तुम्हे
खुद से ही डर गई थी मैं
डर था । न कोई
तकलीफ दे दु तुम्हे
आख़िर मां जो बन गयी थी मैं।।
पहली बार तुम्हे
खुद से ही डर गई थी मैं
डर था । न कोई
तकलीफ दे दु तुम्हे
आख़िर मां जो बन गयी थी मैं।।
~प्रियंका~"श्री"
6/10/17
23:43 pm
6/10/17
23:43 pm
जब लिया था गोद मे
ReplyDeleteपहली बार तुम्हे
खुद से ही डर गई थी मैं
डर था । न कोई
तकलीफ दे दु तुम्हे
आख़िर मां जो बन गयी थी मैं।
very nice poetry
धन्यवाद नीतू जी
Deleteमातृत्व की प्राप्ति किसी भी सुहागण का सबसे सुखद एहसास है जब एकसाथ असंख्य एहसास गर्भ की पीड़ा के साथ जन्म ले रहे होते हैं। डर,भय,संशय,पीड़ा के साथ मातृत्व जग उठता है छलक पड़ता है आँखों मे आँसू, सीने में स्वतः दूध उतर आता है। माँ कहलाती है वो।
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर रचना प्रियंका श्री जी।
बहुत बहुत आभार पुरुषोत्तम जी।
Deleteसुप्रभात,
ReplyDeleteमां बनने का अहसास अत्यंत ही खास एवं रोमांचकारी होता है.. अपने अजन्मे शिशु के जन्म को लेकर बहुत सारी आशंकाएं, भयमिश्रित आनंद दिनों-दिन बढ़ते अपने उदर की आकार वृद्धि एक अलग ही रोमांच से भर देती है,
आपने अपनी शब्दों के दृष्टिकोण से बहुत ही प्यारी रचना लिखी,एक मां और शिशु के मध्य नौ महीने के संवाद को रचा.. आंनद विभोर हो उठा मन.. शुभकामनाएं एवं शुभ दिवस..!!
शुभ दिवस अनीता जी। बहुत बहुत आभार।
Deleteसुन्दर भाव। टंकण अशुद्धियों पर ध्यान दें ।आशुयों को आँसुओं आँशु को आँसू कर लें ।
ReplyDeleteआभार जोशी जी। जी बिल्कुल आपकी बात पर पूर्ण ध्यान दूंगी।
Deleteबहुत बहुत धन्यवाद यसोदा जी।
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर मनभावन एहसास....
ReplyDeleteशुक्रिया सुधा जी
Deleteमातृत्व का अहसास कराती हुई आपकी यह ममता भरी रचना
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार शकुंतला जी।
Delete