बहुत वक़्त बाद आज मेरी सहेली निशा का काल आया और उसकी बाते आज मन को बहुत चुभ गयी ।बात ये है कि मेरी सहेली की शादी को पूरे 10 साल हो चुके है कहने को तो उसकी शादी आधी लव और आधी अरेंज थी। पर उसकी शादी में लव क्या था उसका आज तक मुझे पता नही चला । क्योंकि मेरा मानना है कि तकरार हर रिश्ते का एक पहलू है पर उसमे प्यार होना भी उतना ही जरूरी है पर जहां सिर्फ तकरार हो और प्यार सिर्फ रात का हो तो मुझे नही पता इसे कोन सी मेर्रिज कहते है मेने काफी लोगो को कहते सुना है कि कोई जानवर भी जब हमारे घर मे 1 साल रह जाता है तो हम उससे प्यार करने लगते है। पर जब बात किसी स्त्री की आती है जो अपना सब कुछ छोड़ कर अपने पति के भरोसे अपने ससुराल इस सोच में आती है।कि कुछ भी हो जब भी कुछ गलत होगा तो घर के बड़े और मेरे पति तो साथ होंगे ही।और सही का साथ भी देंगे ,मुझे मेरी गलती पर दांत भी जयरग पर अगर गलती पति या घर के किसी ओर सदस्य की होगी तोभी उनको भी वही सजा मिलेगी जिस पर मेरा हक भी होगा। पर क्या गुजरती होगी उस नारी पर जिसे एक जानवर से भी कम आंका जाए। जिसे सिर्फ अपने इस्तेमाल की वस्तु समझ जाएं ।या यूं कहूँ,की बहुत सारा पैसा और समान साथ मे लेकर आने वाली नौकरानी। हम एक जानवर को अपना मान सकते है पर उस लड़की को उस नारी को नही जिसे हम खुद अपनी पसंद से लेकर आये है।क्यों क्योंकि वो किसी दूसरे की बेटी है क्योंकि वो कभी कभी अपने माता पिता से मिलने की जिद करती है क्योंकि अपनी सारी जिमेदारियो को निभाने के बाद भी उसे ताने मिलते है और जब तक उसकी सीमाएं होती है वो फिर भी चुप रहती है ओर सीमाएं टूटते ही जबाब देती है क्योंकि वो ससुराल बालों के हिसाब से नही चलती .....
ऐसे दिमाग बाले लोगो से मेरी एक ही दरख्वास्त है
आपके घर मे पल कुत्ता भी आपको काट लेता है जब अप्प उसे जरूरत से ज्यादा परेशान करते हो फिर वो तो सोच समझने वाला इंसान है उसकी भी सीमायें है जब गुसी में आपका बीटा उसकी पत्नी पर हाथ उठता है उसे सबके सामने जलिक करता है तब ये समझदारी कहा जाती है अतः निवेदन है कि आपके घर आई किसी ओर की बेटी से अपेक्षा करने से अच्छा पहले आप उसकी अपेक्षायो पर खरे उतरे । उसको वो प्यार वो सम्मान देकर तो देखे फिर भी बात न बने तो एक बार उससे बात तो करे पर तरीका सम्मान जनक हो क्यों कि ये बात हमेसा ध्यान देने योग्य है कि "हमारी इज्जत हमारे हाथ" ।अगर हमने बात करने का सलीका खोया तो बड़े होकर जो भूल हो गयी। उससेे आपके छोटे आपको काफी देर तक बड़े होने की इज्जत तो दे पाएंगे । पर ज्यादा देर तक नही ।उसे अहसास तो दिलाये की जिस घर वो आयी है वो उसका ही घर है उसे जहां घर की बहू होने की जिम्मेदारियाँ निभानी है वही बेटी का होने का फर्ज दोनो घरो में भी पूरा करना है और इस सफर मैं वो अकेली नही उसका हमसफर हमेसा उसके साथ है । आपने कभी एक टायर पर गाड़ी को चलते देखा है या बिना माचिस दिए को जलाते ।बिल्कुक इसी तरह पति पत्नी का रिश्ता भी है जो एक दूसरे के साथ, प्यार ,सम्मान, विश्वास और त्याग के बिना अधूरा है जो ये बाते जितने जल्दी जान जाए बो सही बुद्धिमान व्यक्ति है क्योंकि अज्
आज के युग का एक बहुत अच्छा स्लोगन है जैसा करोगे वैसा भरोगे .....तो सोच समझ कर किया काम हमेसा सफलता दिलाता है अतः निवेदन है अपने घर लाये बहु से वैसा ही व्यहार करे जैसा वो आप सब से चाहती है जैसे आपकी संतान को कष्ट होता है तो पीड़ा आपको होती है जरा सोचो वो तो किसी ओर की बेटी अनजान लोगों के बीच अपना सब छोड़ आए है इस नई दुनिया को अपना बनाने। क्या .?.......हमारी आत्मा हमे उसे कष्ट देते दर्द महसूस क्यों नही करती ।क्या हुन सच मे इंसान है जरा सोचिए और अपना स्वंम का आत्मनिरीक्षण कीजिये।।
~प्रियंका~"श्री"
7/10/17
23:32
Saturday, October 7, 2017
मन की बात
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कविता
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