कुछ पल के लिए ,तुमसे बिछङना
मेरी चाहतों का बढ़ना
ये मोहब्बत नहीं,तो क्या है।
चेहरे का तुम्हारे,एक पल के लिए भी ओछ्ल होना
सांसो का मेरे अनियमित होना
ये मोहब्बत नहीं,तो क्या है।
एक झलक पाकर तुम्हारी,दिल मे बसे
प्यार के जज़्बातों का,तूफान सा उमड़ना
ये मोहब्बत नहीं,तो क्या है
इन तूफानी हवाओं में,कुछ इस तरह
मदहोश हो जाना,तुमसे मिलने की
नई आश का पुनः जाग जाना
ये मोहब्बत नहीं, तो क्या है
आँखों में बसे आँसूओ का,सैलाब उमड़ना
इन सैलाबों में,यूँ डूब जाना
मेरे मन की अधीरता को,विदीर्ण कर जाना
ये मोहब्बत नहीं,तो क्या है
अधरों पर रहना सदा, नाम का तुम्हारे
प्राणदायनी वायु सा, सदा साथ रहना
ये मोहब्बत नहीं,तो क्या है
गर है, ये मोहब्बत तो, दिल से कुबूल कर
इसमे बसी तेरी चाहत,जिन्दगी है मेरी
जो तुझपर फ़ना है,इस कदर।
~प्रियंका"श्री"
25/1/18
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