Sunday, November 5, 2017

बहुत वक़्त बाद.....

बहुत वक़्त बाद आज
खुद को खुद से मुक्त पाया है
अपेक्षाओं पर सबकी न
खड़े होने पाने का दुख
न खुद पर जताया है
बहुत वक़्त बाद आज
खुद को खुद से मुक्त पाया है।
जो हर पल बीत जाता था
यही सोच कर
क्या करें ऐसा जो हम पर
भी प्यार हो उन सबका
थकते कदमो ने अब रुक जाना
ही बेहतर पाया है
मेरे साये ने मुझमे रहकर
मुझे पाने का हक़ जताया है
बहुत वक्त बाद आज
खुद को खुद से मुक्त पाया है।
टूट कर भी जब उनकी
उम्मीदें पूरी करते चले थे
फिर भी कुछ न कर ,पाने का गम
हमने जो उनसे पाया है
रास्तों ने समझा मुझे
आह! अपनों ने जो ठुकराया है
बहुत वक्त बाद आज
खुद को खुद से मुक्त पाया है।
वक्त का असर कुछ यूँ छाया
जो खुश थे दौलत शोहरत से हमारी
चले जाने का गम खुद से ज्यादा उनमे पाया है
थकते नही थे जो
तारीफों के कशीदे कसना हमारी
आज बात करना भी उन्होंने मुनासिब न पाया है
बहुत वक्त बाद आज
खुद को खुद से मुक्त पाया है।
देख अपनो से भरी दुनियाँ का ये चेहरा
हमने खुद मे रहना ही मुनासिब पाया है
आज वक़्त जिसने हमें
खुद से खुद को मिलाने का जो जिम्माा उठाया है
खुद से खुद की बातों का
मजा लेने का जो आया है
बहुत वक्त बाद आज
खुद को खुद से मुक्त पाया है।।
                         ~प्रियंका"श्री"
                           6/11/17

2 comments:

  1. बहुत अच्छा लिखा

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  2. ख़ुद से मुक्त हो के हाई जीवन का आनंद पाया जा सकता है ...
    भावपूर्ण लेखन ...

    ReplyDelete

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