कहानी और उसके किरदार
कहानी की तलाश में,
भटकते हुये,
जब रास्तों,
चौराहों से गुजरते हैं।
भटकते हुये,
जब रास्तों,
चौराहों से गुजरते हैं।
हर एक मोड़ पर,
अपरिचित कितनी कहानियाँ,
महसूस कर जाते हैं।
अपरिचित कितनी कहानियाँ,
महसूस कर जाते हैं।
न जाने,
कितनें किरदार,
नजरों में समा जाते हैं।
कितनें किरदार,
नजरों में समा जाते हैं।
उस,
हर एक किरदार में,
छुपी होती हैं।
हर एक किरदार में,
छुपी होती हैं।
अनभिज्ञ असंख्य कहानियाँ,
कुछ जानी-बुझी सी,
कुछ अनजानी सी
प्रतीति।
कुछ जानी-बुझी सी,
कुछ अनजानी सी
प्रतीति।
कुछ चित्त छू जाती हैं,
कुछ हँसा जाती,
कुछ आँखों में,
करुणा जगा जाती हैं।
कुछ वीरता से परिपूर्ण,
कुछ वात्सल्य,
कुछ भक्ति भाव से पूर्ण,
तो,
कुछ रोष उत्पन्न,
कर जाती हैं,
कुछ अल्हड़ सी,
प्रतीत हो जाती हैं।
तो,
कुछ रोष उत्पन्न,
कर जाती हैं,
कुछ अल्हड़ सी,
प्रतीत हो जाती हैं।
जब किरदारों को,
शब्दों में पिरोके,
उसमें भावों का,
पिटारा घोल के,
प्रस्तुत करते हैं।
शब्दों में पिरोके,
उसमें भावों का,
पिटारा घोल के,
प्रस्तुत करते हैं।
तब कहानीकार की
कहानी पूरी होती हैं।
कहानी पूरी होती हैं।
जो मुझसे,
तुमसे,
हम सब से,
जुड़ी हुई होती हैं।
तुमसे,
हम सब से,
जुड़ी हुई होती हैं।
लिखी गयी,
हर कहानी,
एक आम आदमी से शुरू,
एक आम आदमी,
पर खत्म होती हैं।
~प्रियंका"श्री"
12/12/2017
हर कहानी,
एक आम आदमी से शुरू,
एक आम आदमी,
पर खत्म होती हैं।
~प्रियंका"श्री"
12/12/2017
शब्दों का अद्भुत प्रयोग....
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद शश्रीवास्तव जी।
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद शश्रीवास्तव जी।
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद लोकेश जी।
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