Tuesday, December 5, 2017

यादें

     यादें
नमक सी
नमकीन,
इमली सी
खट्टी,
रसगुल्ले के सीरे सी,
मीठी-मीठी,
हरी मिर्ची सी
तीखी-तीखी,
होती हैं यादें।
कभी आसुँयो में
भीगी सी,
कभी चेहरे पर खिलती
हंसी सी,
कभी चिंता में
डूबी सी,
होती हैं यादें।
आती हैं जब
याद यादें,
मीठा सा दर्द दे जाती हैं।
कभी दिल बैचैन,
तो,
कभी होठों पर
मुस्कान बन,
खिल जाती हैं।
कभी-कभी,
दिल को,
गुदगुदा जाती हैं।
तो कभी मन में,
रोष जगा जाती हैं।
ऐसी होती हैं,
यादें।
आती हैं जब,
याद यादें।
न जाने कितने
भावों में सिमट
जाती हैं।
जैसी भी हो
यादें ,
जब भी याद आती हैं,
अपनों परायों का फर्क
भूल जाती हैं।
न जाने कितने,
अरमान जगा जाती हैं।
छूट जाते हैं जो,
बरसों से,
यादें ही उनको
यादों में,
मिलवा जाती हैं ।
रूठना मनाना,
सब छुपा होता हैं
यादों में,
जीवन के अतीत की
कहानी कह जाती हैं।
भूल भी जाये गर इन्हें,
यादें तो यादें हैं
सदा साथ निभाती हैं।
खुशकिस्मत होते हैं वो,
जिनके पास यादें रह जाती हैं।
कभी जीवन जीने की,
प्रेरणा बन जाती हैं,
तो कभी ,
उदास मन को,
खुशी दे जाती हैं।
ऐसी होती हैं यादें,
आती हैं जब,
याद यादें।
चलों मिलकर हम,
ऐसी यादें का,
निर्माण करें।
जब भी स्मृति हो,
उन यादों की।
तो दिल में सम्मान हो,
मन में सुकून हो,
जो होठों पर मुस्कान करे।।
                        ~प्रियंका"श्री"
                          27/9/17

3 comments:

  1. बहुत अच्छी है।बस आँसुयो की जगह आंसूओं होंना चाहिए

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  2. bahut sunder
    sahi kaha aapne
    yade dikhti nahi par roop anek hai

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  3. बहुत बहुत आभार नीतू जी।

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