मेरा लिखा हर शब्द
मुझे मजबूर करता है कि
मैं आपने अंदर दबे जज्बातों को
इस कदर लिखूं की
पढने वाला भी
उसे उसी ख्याल से महसूस करे
जिस ख्याल से उसे लिखा गया हो
जिसमे
न कोई दिखावा हो
न कोई विवशता हो
न कोई शर्म हो
न कोई अभाव।
जिसमे भरजे पड़े हो हर भाव
जिन भाव पर अधिकार हो
उन सब का जो लिखे गए हो
उन सब के लिए
जो पाठक हो उनके।
~प्रियंका"श्री"
17/1/18
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