Thursday, February 8, 2018

मुझे मेरे अक्स से प्यार है

मुझे मेरे अक्स से प्यार है,
तभी तो,
सजाती रहती हूं अपने चेहरे को।

पर देखो ये निष्ठुर आईना,
मेरे दीदार के बाद भी,
मेरी तारीफों के कसीदे नही पढ़ता।

शायद उसे इल्म है,
मेरे उस चेहरे का,
जिसे मैंने छुपा रखा है,
दुनियां वालो से।
                ~प्रियंका"श्री"

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कविता

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