आसान नहीं था,
पंख फैलाकर उड़ना यहाँ।
पर आसमान भी तो,
किसी के हिस्से का नहीं था।
गर गूँजती आवाज़ों में बंध जाते
तो आज शायद
अपना आसमान तक नहीं पा पाते।
मंजूर नही था जो हमें, इसलिए तो
फैला लिए पंख अपने,
और कर लिया पूरा आसमान,
जो कभी मेरे हिस्से ,
में ही नहीं था
प्रियंकाश्री
16/3/18
बहुत उम्दा लिखा है।
ReplyDeleteथैंक यू dear
Deleteबहुत खुब
ReplyDeleteआभार सरिता जी
ReplyDeleteआभार सरिता जी
ReplyDeleteआभार आदरणीय
ReplyDeleteआभार आदरणीय
ReplyDeleteगर गूँजती आवाज़ों में बंध जाते
ReplyDeleteतो आज शायद
अपना आसमान तक नहीं पा पाते।----
बहुत मार्मिक सत्य !!!!!!! खुद के पंख मजबूत कर उड़ान भरनी पड़ती है तभी आसमान मिलता है |बहुत सुंदर सार्थक पंक्तियाँ == प्रिय प्रियंका जी --- सस्नेह ---------
बहुत बहुत आभार रेनू जी।आप सब के अल्फाज जब मेरे लिखे शब्दो को सराहते है तो सच मानिये ।मैं आत्मविश्वास से न सिर्फ भर जाती हूँ बहुत प्रेरित भी होती हूँ बस अगर गलतियां हो तो एक अच्छे मार्गदर्शक की तरह सदा मार्गदर्शन दे
Deleteबहुत ख़ूब
ReplyDeleteयही हिम्मत चाहिए आसमान ख़ुद ब ख़ुद क़ब्ज़े में आ जाता है ...
प्रेरित करते शब्द ... लाजवाब रचना ...
बहुत बहुत आभार दिगम्बर जी। सदा यूँ ही मार्गर्दर्शन दे
Deleteबहुत बहुत आभार दिगम्बर जी। सदा यूँ ही मार्गर्दर्शन दे
Deleteबहुत खूब कर्म को अग्रसित करती आशावादी पंक्तियाँ ।
ReplyDeleteतूं उड के तो देख सारा आसमान तुम्हारा है
परवाज का आगाज ही हौसला तुम्हारा है ।
Bahut khoob di....abhar
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