Thursday, March 29, 2018

शायरी

बार-बार ये ख़ता करूँ, हर बार ये ख़ता करूँ
जब भी तू निकले करीब से मेरे,  नज़रों से तेरे चेहरे का सज़दा करूँ।
खुद को रोक सकूँ ,अब ये मुनासिब नहीं
तेरे इश्क़ में खुद को अब ऐसे फ़ना करूँ।
                                     प्रियंका "श्री"
                                     29/3/18
     

8 comments:

  1. सुभान अल्लाह....

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  2. बहुत सुन्दर...
    वाह!!!

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  3. लाजवाब प्रियंका जी
    हर खता मुआफ है इस खता के बाद
    तू मुझे देखा करें और मैं तेरा सजदा करूं !

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  4. वाह बहुत खूब उम्दा शेर।।

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