बार-बार ये ख़ता करूँ, हर बार ये ख़ता करूँ
जब भी तू निकले करीब से मेरे, नज़रों से तेरे चेहरे का सज़दा करूँ।
खुद को रोक सकूँ ,अब ये मुनासिब नहीं
तेरे इश्क़ में खुद को अब ऐसे फ़ना करूँ।
प्रियंका "श्री"
29/3/18
जब भी तू निकले करीब से मेरे, नज़रों से तेरे चेहरे का सज़दा करूँ।
खुद को रोक सकूँ ,अब ये मुनासिब नहीं
तेरे इश्क़ में खुद को अब ऐसे फ़ना करूँ।
प्रियंका "श्री"
29/3/18
सुभान अल्लाह....
ReplyDeleteBahut bahut shukriya
Deleteबहुत सुन्दर...
ReplyDeleteवाह!!!
Bahut bahut shukriya sudha ji
Deleteलाजवाब प्रियंका जी
ReplyDeleteहर खता मुआफ है इस खता के बाद
तू मुझे देखा करें और मैं तेरा सजदा करूं !
Shukriya di .
Deleteवाह बहुत खूब उम्दा शेर।।
ReplyDeleteShukriya di
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