ये तो उस ख़ुदा की खुदाई ठहरी ,
मेरी मोहब्बत की सच्चाई ठहरी,
जो ख़ुदा ने हम पर यूँ रहम किया।
वरना वो तो आफ़ताब ठहरा,
उसे छूने का हममें कहा दम था।
प्रियंका"श्री"
24/4/18
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कविता
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वाह 👏 खूबसूरत शायरी
ReplyDeleteAabhar sudha ji
Deleteवाह!!
ReplyDeleteAbhar sudha ji
Deleteवाह क्या बात है आफताबे ताव से आंखे चार कर बैठे।
ReplyDeleteउम्दा।
Aabhar di
DeleteAabhar di
Deleteबड़ी जानलेवा पंक्तिया हैं प्रिय प्रियंका !!!!!!!!!! वाह !! और सिर्फ वाह !!!!!!!!
ReplyDeleteBahut bahut aabhar priy renu
Deleteवाहहह खूब
ReplyDeleteBahut bahut aabhar lokesh ji
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