मैं भी हूँ,
तुम भी हो,
और वो अधूरी बात भी है।
तुम भी हो,
और वो अधूरी बात भी है।
मैं भी यहाँ,
तुम भी यहाँ,
और ये चाँदनी रात भी है।
तुम भी यहाँ,
और ये चाँदनी रात भी है।
रात के अंधेरे में
चाँद की पहरेदारी में
उन असँख्य सितारों
की टिमटिमाती रोशनी में
कह दो।
चाँद की पहरेदारी में
उन असँख्य सितारों
की टिमटिमाती रोशनी में
कह दो।
कह दो,
जो भी हो दिल मे,
उसे मत रोको,
जो छुपा रहे हो बरसों से,
उसे आज जुबान पर रखकर,
दिल की धड़कनों को बढ़ाकर,
कह दो मुझे।
जो भी हो दिल मे,
उसे मत रोको,
जो छुपा रहे हो बरसों से,
उसे आज जुबान पर रखकर,
दिल की धड़कनों को बढ़ाकर,
कह दो मुझे।
क्या पता?,
क्या पता ?,
कल ये रात हो न हो,
तुम्हारी मेरी बात हो न हो,
आज ये साथ है,
कल ये साथ हो न हो।
क्या पता ?,
कल ये रात हो न हो,
तुम्हारी मेरी बात हो न हो,
आज ये साथ है,
कल ये साथ हो न हो।
फिर ये अधूरी बातें,
महज़ अधूरी याद बन जायेंगी,
जो तुम्हारी रूह में ही,
सिमट कर रह जाएंगी।
महज़ अधूरी याद बन जायेंगी,
जो तुम्हारी रूह में ही,
सिमट कर रह जाएंगी।
फिर तलाशोगे भी तुम,
वक़्त वो पहला,
जो मिल न पायेगा तुम्हें,
तो ये अधूरी बात,
सदा के लिए ही,
एक अधुरा ख्वाब बन जाएगी।
वक़्त वो पहला,
जो मिल न पायेगा तुम्हें,
तो ये अधूरी बात,
सदा के लिए ही,
एक अधुरा ख्वाब बन जाएगी।
गर पहुँचा न सके मुझ तक ,
ये अधूरा ख़्वाब तुम,
तो ये ख़्वाब हमारी जिंदगी की कयामत की ,
आखिरी रात बन जाएगी।
प्रियंका "श्री"
17/4/18
ये अधूरा ख़्वाब तुम,
तो ये ख़्वाब हमारी जिंदगी की कयामत की ,
आखिरी रात बन जाएगी।
प्रियंका "श्री"
17/4/18
Kya baat kya baat
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद दीपाली जी
DeleteBahut accha likha aapne....behad shandar
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद नीतू जी
Deleteसुंदर श्रृंगार काव्य उच्चतम काव्यात्मक सृजन
ReplyDeleteधन्यवाद दी
Deleteधन्यवाद अमित जी
ReplyDeleteप्रिय प्रियंका जी -- अनुरागी मन की अनुपम मनुहार | सच है समय निकलने से पहले मन की बात कह देने में ही जीवन की सार्थकता है | श्रृंगार रस की सुंदर रचना | सस्नेह
ReplyDeleteBahut bahut abhar renu ji
ReplyDeleteBahut bahut abhar renu ji
ReplyDelete