किताबों से रिश्ता मेरा ,उतना पुराना है,
जितनी पुरानी है ,उसके पन्नो में रखे हुए
फूलों की खुशबू,
जितना पुराना मुरझाया गहरे रंग का वो फूल,
जिसका अक़्स आज भी
मेरी किताब के पन्ने पर छपा हुया है
जितनी पुरानी है मोहब्बत मेरी
जितनी पुरानी है इबादत मेरी,
मेरे ख़ुदा के लिए,
जितनी पुरानी है वो शायरी,
जो आज तक भूली नहीं गयी,
ये रिश्ता मेरा ,मेरी किताबों से ,
मेरी पहली इज़हारे मोहब्बत है।
प्रियंका"श्री"
24/4/18
Tuesday, April 24, 2018
किताबें
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कविता
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
बहुत खूब प्रियका जी !!!!!!!-- सचमुच किताबो से ये भावप्रणव रिश्ता ही सही अर्थों में हमे इन्सान बनाता है ये वो दोस्ती है जो कभी दगा नहीं करती | सस्नेह
ReplyDeleteइतने सुंदर व मनोबल बढ़ाने वाले कमेंट के लिए बहुत बहुत आभात रेणु जी।मनोबल दो गुना हो जाता है
ReplyDeleteबहुत सुंदर
ReplyDeleteथैंक यू लोकेश जी
Deleteबहुत खूब ...👌👌👌
ReplyDeleteकिताबों से रिश्ता मेरा ,उतना पुराना है,
ReplyDeleteजितनी पुरानी है ,उसके पन्नो में रखे हुए
फूलों की खुशबू.......बहुत खूब
ये मुहब्बत यूँ ही बनी रहे ... किताबें साथ देती रहें ...
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