Tuesday, April 3, 2018

ख़्याल

जिंदगी आसान समझ ली थी उसनें शायद
तभी इतना बेपरवाह हो गया।
जिस दौड़ में भागा था वो, निकलने को आगे
जान भी न सका ,कब उस दौड़ से गायब हो गया।
                                      प्रियंका"श्री"
                                      4/4/18

11 comments:

  1. बहुत ही सुंदर।

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  2. सचमुच अंधी दौड़ में इंसान अपना अस्तित्व ही मिटा डालता है | सार्थक पंक्तियाँ !!!!!!!

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  3. नमस्ते,
    आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
    ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
    गुरूवार 5 अप्रैल 2018 को प्रकाशनार्थ 993 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।

    प्रातः 4 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक अवलोकनार्थ उपलब्ध होगा।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
    सधन्यवाद।

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    1. बहुत बहुत आभार रविन्द्र जी

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  4. सच है अंधानुकरण से कुछ भी हासिल नहीं होता है, फिर भी कुछ लोग जिंदगीभर नहीं समझ पाते इतनी सी बात
    बहुत खूब!

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  5. सार्थक पंक्तियाँ !!

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