मोबाइल में यूट्यूब पर रोज की तरह ही अपने लेक्चर देख- सुन रही थी तभी एक विज्ञापन आया मदर्स डे पर, विज्ञापन को देख मुझे याद आया कि अरे कल तो मदर्स डे है। पर कुछ ही देरी में खुशी से खिला चेहरा मुरझा गया ,आखिर अपने घर से दूर अपने माँ पापा से इतनी दूर भोपाल में पढ़ने जो आयी थी और मेरी परीक्षा भी 1 हफ्ते बाद ही थी तो घर भी नही जा सकती थी। तभी दिमाग मे आया कि आज के टेक्नोलॉजी के जमाने मे दूर रहकर भी मैं अपनी माँ को गिफ्ट भेज सकती हूं तो मैंने ऑनलाइन शॉपिंग की सभी साइट को देख डाला और एक अच्छी सी घड़ी पसन्द कर मां के लिए खरीद ली और घर के पते पर भेज दी।
इतना करने पर भी एक खाली पन सा था मन मे, क्योंकि घर पर मदर्स डे पर मैं सुबह होते ही मां को गिफ्ट्स देती, उनके मन का खाना बनाती और शाम को हम दोनों घूमने जाते।
पर आज मां के लिए गिफ्ट तो खरीद लिया बाकी की पूर्ति के लिए मैं उनके पास न थी। अधूरी खुशी लिए मन पढ़ने में न लगा तो किताब बन्द कर ,आँखें मूंद ली ।पता न चला कब आंख लग गयी और लगभग एक ढेर घण्टे बाद जब आँख खुली तो हॉस्टल में खाने का वक़्त हो चला था मन न होते हुए भी खाने के लिए मेस में चली गयी । वहां देखा सब लड़कियां खाना खा रही है और मदर्स डे पर बात कर रही है ,तभी हमारे मेस के भैया आये और बोले-
आप सब कितना सोचते है अपने माता पिता के बारे में ,आप लोगों ने अपनी माँ के लिए गिफ्ट भी भेज दिए और एक तरफ उन लोगो के बारे में सोचो जो अपने माता पिता को वृद्धा आश्रम में छोड़ देते है और उनकी खैर खबर भी नही लेते।
ये कहकर भैया तो चले गए पर मेरे मन मे न जाने क्यूँ ? एक बैचेनी छोड़ गए ,बैचेनी इसलिए क्योंकि मैं भी अपनी माँ से दूर थी और माँ मुझसे।
तभी जल्दी खाना खत्म कर । मैंने अपने क्लास के व्हाट्सअप ग्रुप पर मदर्स डे सेलिब्रेट करने की बात कही ,कुछ ही वक़्त में सबका पोजेटिव रिस्पांस मिलने लगा और प्रोग्राम बन गया कि कल हम सब पास के वृद्धा आश्रम जाएंगे और सबने अपनी जिम्मेदारियां बांट ली।
सुबह 10:30 बजे मिलने का बोल मैं सुबह के इन्तेजार में सो गई। सुबह के सात बजे का अलार्म बजा मैं तुरन्त उठकर जल्द से जल्द तैयार होने चली गयी।
ठीक 10:30बजे तक हम सब कॉलेज में इकट्ठे हुए।
केक,बलून्स,गिटार,खाने पीने की कई चीजें लेकर निकल पड़े अपनी मंजिल की ओर।
लगभग साढे 11 बजे हम सब वृद्धा आश्रम पहुँच गए और वहां की अथॉरिटी से बात कर सब बुजुर्गों से मिलने लगे।
वहां की सभी बुजुर्ग माओं ने मिलकर केक काटा , मेरे कई क्लासमेट ने गाना गाया ,डांस किया हमारे साथ सभी लोगो ने बहुत एन्जॉय किया और इस एंजॉयमेन्ट में पता ही नही चला कि कब शाम के 6 बज गए और वक़्त जाने का आ गया।
ये मदर्स डे तो मैंने बहुत एन्जॉय करके मनाया पर जाते वक्त हम सब की आँखों मे आँसू थे आँसू इस बात के नही थे कि हम सब उनको खुशियां देकर फिर उन्हें तकलीफ देकर जा रहे थे । आँसू तो इस बात के थे कि फिर उनको इन्तेजार दे रहे हैं फिर किसी दुसरे के आकार उनके जीवन के कुछ पलों में कुछ पल की खुशियां देने का ।
वो भी ऐसी खुशियाँ जो हमेशा अधूरी रहेगी।
बहुत कीमती होता है वो आँचल
जिसकी छांव में ठंडक नसीब होती है
ऐसा नसीब भी सबका होता है कहाँ
जिनका होता है वो खूब ,
जिनका नही वो बदनसीब होते है
Happy mother's day
लेखिका
प्रियंका श्री
Happy mother's day.....bahut hi khoobsurat lines
ReplyDeleteBahut bahut shukriya...Apko bhi aur deri se jabab dene ke liye mafi mangati hu
Deletesundar abhivyatki, happy mother's day
ReplyDeleteDhanyawad apko bhi bahut bahut shubhkamnayein aur deri se jabab dene ke liye mafi mangti hu
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