वो कौन थी
आज वो कौन है
सिकन है ये कैसी
माथे पे उसके,
अनजान हो गये
चेहरे की, वो खुशी ,
वो कौन थी
आज वो कौन है।
लिपटी है खुदमे
या खुल सी गयी है
मासूम सी मायूस सी
कली
वो कौन थी
आज वो कौन है।
लफ्जों में बंधी है
पढ़ी गयी है अर्थों में
अनसुलझी सी
एक अनजान पहेली
वो कौन थी
आज वो कौन है।
ख़्वाओं में देखा था जिसे
ख्वाहिस थी जिसकी
अधूरे ख्वाब से रह गयी
वो कौन थी
आज वो कौन है
आँसुयों की सच्चाई है
या बंद लबों के शब्द
जानता था मैं जिसे
वो कौन थी
आज वो कौन है
लड़कपन सा था जिसमे
सयानी फिर भी दिखती थी
रहती थी जो अपने धुन में
वो कौन थी
आज वो कौन है
समझा जिसे न तब कोई था
न अब कोई समझ सका
मीलो चलते रास्ते सी
अजनबी,
वो कौन थी
आज वो कौन है
प्रियंका श्री
14/7/19
Sunday, July 14, 2019
वो कौन थी
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कविता
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