Friday, April 17, 2020

शायरी

गर ख़ुदा का पैग़ाम आ जाये
मौत हमारे नाम या जाये
करते वक़्त रुख़सत ए-हमनशीं
बस इतनी गुज़ारिश मान लेना
जब भेजो मुझे ख़ुदा के घर 
साथ मेरे दो किताबें रख देना।।
प्रियंका श्री
18।4।20

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