Monday, May 25, 2020

कुछ अधूरा था अधूरा ही रह गया...

कुछ अधूरा था अधूरा ही रह गया
पूरा होता भी कैसे ?

आज अचानक उनका खत मिला
लिखा था अब खत न लिखना
बहुत सह चुका हूँ तुम्हें
आदतें अब तुम्हारी सही नही जाती
उसका कहना हुआ और हम बेज़ुबान हो गए
बस याद आ गयी तो वो पहली की बात
जिसमें कह दिया था मैने 
संभालना मुझे आसान नही 
टूट कर बिखरी हस्ती हूँ मैं
पुनः समिटना मेरा ठीक नही 
ये बात समझना जरूरी थी
तभी कहती हूँ मैं , 
रास्तों का एक होना ठीक नही 
छा गयी थी खामोशी ,उस वक़्त कुछ पल के लिए
टूटी भी जब तब जबाब उसका मिला
 संभाल लूंगा तुम्हें, समेट दूँगा इस बिखरन को
बस मेरे इजहार को हाँ करदो।
और आज भी यही सवाल ।
प्रियंका श्री
25।6।20

Wednesday, May 20, 2020

kya main corona posative hun.

प्रियंका खरे द्वारा रचित,अनुराग जैन द्वारा अभिनीत, तरुण परमार द्वारा कैमरे में कैद इस शॉर्ट फ़िल्म में आप कोरोना संदिग्ध की मानसिक स्थिति को महसूस करेंगे जिससे आज न जाने कितने लोग गुजर रहे है। सोसाइटी का नज़रिया उसके और उसके परिवार के लिए किस तरह बदल जाता हैं और उसके मानसिक अंतर्द्वंद की उलझन को बयां करती है यह समसामयिक शॉर्ट - क्या मैं एक कोरोना पॉजिटिव हूँ ??

Am I a Corona Positive ?? In this short film written by Priyanka Khare, acted by Anurag Jain and captured by Tarun Parmar , you will feel the mental state of a Corona suspect which so many people are passing through today. How the society's attitude changes for him and his family and the confusions of his mental impulse, is shown in this contemporary short.

Monday, May 11, 2020

मजदूर

आधार है तू मेरा
फिर भी तेरी कीमत नही
देश कोई भी हो
 इज्जत तेरी नही
बिन तेरे बड़े से बड़ा काम
भी न हो पाए
पर ये बात नीति निर्धारकों
को कौन समझाए
जिन्हें तो सिर्फ 
विकास की होड़ में
बड़े बड़े कारखाने खोलने है
पर सोचा है थोड़ा भी
गर न हो तुम तो ये सिर्फ
मशीनों के ढेर है
फिर भी तेरी गिनती
इंसानों में नही होती
हर मूल सुविधा से वंचित तू
सिर्फ रास्ते तलाशता रहता है
तेरी फिक्र भी किसे होगी
न बल है 
न पास जो पैसा रहता है
है वो भी मेहनत जो
कौड़ियों में बिकती है
तेरे पास एक
आस का दीपक है
जो रोज जलता बुझता है
तेरी बदकिस्मती भी देखो
जीवन मरण के इस चक्र में
जीवन भर तू दो वक़्त जून को
फिरता है।
मिलता है आपार धन भी जब
 तुझे ,
 तब तू मृत्यु से मिलता है
लाचार कमजोर तू
"मजदूर" नाम से बिकता है।
प्रियंका खरे"श्री"
10-4-20
 

Tuesday, May 5, 2020

शायरी

इंसान अब इंसान नहीं
मुखोटों का बादशाह है
जितने उखेड़ोगे उतने पाओगे
प्रियंका श्री
5।4।20

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...