Saturday, July 25, 2020

पापा का साथ

मम्मा पापा कब तक आएंगे?
मेरी प्यारी सी बेटी अभी वक़्त है । पापा 6 बजे तक आते है न । 
हाँ मम्मा । आज पापा आएंगे तो उनको बहुत सारी बातें बताऊंगी।
बेटी को अपनी गोद में बिठा कर मां बोली- बिल्कुल।
बेटी कभी टीवी तो कभी अपनी गुड़िया इन्ही दोनों के साथ खेलती वक़्त गुजारने लगी।
कुछ घंटे बाद उसकी मम्मी का मोबाइल बजा।
हेलो पापा
हाँ बेटा, आप कब तक आ रहे हो।
बस निकल गया हूँ आफिस से, मम्मी से पूछो कुछ लाना है। 
जी पापा
मम्मी पापा पूछ रहे है कुछ लाना है पापा ऑफिस से निकल आये।
मम्मी-नहीं कुछ नहीं लाना।
बच्ची-नहीं पापा कुछ नहीं लाना ,पर मेरे लिए मेरे बिस्किट ले आओगे ।
पापा-हाँ
बड़ी ही बेताबी के साथ बच्ची का इंतेज़ार शुरू होता है
लगभग आधे घण्टे बाद उसके पापा घर आते है।
बेटी बड़ी प्यारी नज़रों से पापा को देखती है और उनके बोले बिना ही दिन भर की सारी कहानी कहना शुरू करती है।
पर इन सब में उसके पापा का ध्यान न तो बेटी पर होता है न उसकी खुशी पर। बस ध्यान और आँखे उनके मोबाइल पर होती है। 
उस नन्ही ज़ान को तो यही अपने पापा का प्यार लगता है। पर ये सब देख रही उसकी माँ आहत हो जाती है।
क्योंकि न तो अब पिता की गोद है जहां सिर रखकर पिता प्यार से बच्चे के सिर पर हाथ फेर सके।
न अब पिता की सलाह है जहां सुन बच्चे की बातें वो उसे समझा सके। और न ही अब पिता के साथ बिताया वो समय है ।
कभी कभी सोचती हूँ । हम अपने बच्चों को क्या दे रहे है सिर्फ आदतें । क्या यादें दी है जो असल में जीवन की बहुत बड़ी पूंजी है क्योंकि जब हताशा या निराशा हाथ थामती है तो यही यादें मनोबल देती है। पुराने दौर के हर बच्चे को आज भी अपने पापा के साथ बिताए हर पल याद है। पर क्या आज के परिवार के बच्चों को ये खज़ाना मिला है। पूछिये ख़ुद से ये सवाल और तलाशिये इसके जबाब।
ख़ुद के लिए न सही अब इनके लिए ज्यादा नही थोड़ा सा वक़्त इनको दे दे। इनके ही भविष्य के लिए।
क्योंकि हम तो चले जायेंगे लेकिन दुनियां की हर परिस्थितियों से लड़ने के लिए ये यही रह जाएंगे । उसके लिए हमारा एक दूसरे के साथ बिताया वक़्त ही इन्हें हर मुश्किल से लड़ने की इन्हें ताकत देंगा।
प्रियंका(meeraant)
26/7/20

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