1986 के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में या उसकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं आया । परन्तु अब नई शिक्षा नीति 2020 का आना एक नई सम्भावनायों को तो दर्शाता है पर क्या 34 साल की इस व्यवस्था में नीतियों को लाना तो आसान है पर व्यवहारिक रूप देना भी उतना ही आसान होगा?।
नई शिक्षा नीति 2020 का ड्राफ्ट जितना मनोहारी है क्या उतनी ही क्रियान्वित भी होगी। खैर उसमें बताए गए बिंदु बहुत जरूरी है जिनका व्यहारिक रूप में होना जरूरी भी है।
पर सवाल कई है।
हमारे देश में शिक्षा को पूजा जाता है। और उसको प्रदान करने वाले शिक्षकों को भी। तो क्या नीतियां बदलना या नई नीतियों को लाना ही अपने कर्तव्य को पूरा करना होगा। क्योंकि यहां पहले जरूरत सरकारी स्कूलों के ढांचे सुधारने की , वहां सारी स्कूली व्यवस्थाएं प्रदान करने की है इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण बात ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति करने की है जो अपनी योग्यता के दम पर उस पद को प्राप्त करे फिर चाहे वे कोई भी जाति ,धर्म, समुदाय या परिवार के हो। क्योंकि आज भी कई ऐसे स्कूल है जहां शिक्षक तो है पर वे योग्य नहीं है और ऐसे कई मामले हम सब के सामने आए भी है।
नीति में वोकेशनल पाठ्यक्रम की बात की गई है जो बहुत अच्छी है पर अभी के हालात जो गांवों या शहरों के सरकारी स्कूलों की है कितनी सफल होगीं।
ऐसे कई स्कूल है जहाँ बच्चें की मील दूर चलकर जाते है वहां इंड्रस्ट्रीयल इंटर्नशिप की बात बेमानी नहीं कहूंगी पर हकीकत की दुनियां से बेखबर होना जरूर है।
उच्च शिक्षा की बात हो तो आज भी ऐसे कई कॉलेज है जहां प्रोफेसर ही नहीं है।
शिक्षा के क्षेत्र को राजनीतिक क्रियान्वयन से दूर रखना भी बहुत जरूरी है । क्योंकि अक्सर शिक्षा के मंदिर को हमने राजनीति का अखाड़ा बनते देखा है जो न सिर्फ उसकी मर्यादा को खंडित करती है बल्कि छात्रों की सोच को भी।
ये तो सिर्फ एक मसौदा है जो ये बताता है कि हमें आगे कैसे-कैसे चरणों में बढ़ना है पर असल काम तो है आंतरिक रूप में काम करने की । आशा है कि जैसे ये प्रभावपूर्ण मसौदा आया है ऐसे है शिक्षा को व्यापार और अपने स्वार्थ का ज़रिया बनाने वाले और भी जो कई दोष जो व्याप्त है इसके आंतरिक स्वरूप में उस पर भी विचार किया जाएगा और सुधार भी। क्योंकि देश का भविष्य हमेसा से बच्चें और आने वाली पीढ़ी रही है। यही है देश का आधार। नीतियों को लाना या उसमे सुधार एक कदम को बढ़ाना तो है। पर जिस ज़मीन पर क़दम बढ़ा है उसके ताप को जानना भी उतना ही जरूरी भी है।
प्रियंका"meeraant"
30/7/20
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