बुलंद आवाज़ों को भी दुनियां ने जहाँ नज़र अंदाज़ कर दिया
हमने तो वहाँ उसकी खामोशी में छिपे शोर को भी सुन लिया।
मीरांत
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
बहुत खूब
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