जी नमस्ते,आपकी लिखी रचना शुक्रवार ११ मार्च २०२२ के लिए साझा की गयी हैपांच लिंकों का आनंद पर...आप भी सादर आमंत्रित हैं।सादरधन्यवाद।
माफ कीजिये श्वेता जी मेने अभी ये संदेश देखा ।आपका बहुत बहुत शुक्रिया।
जज़्बाती होकरलिए थे कुछ फैसले बिना तालिमदिल आगे बढ़ चला था–ऐसा कैसे हुआ.. विचारणीय
शुक्रिया
सुन्दर सृजन ।
वो मेरा ही आईना था जो मेरे अक्स से रूठ के खड़ा थावाह!!!
बहुत खूब कहा।
आईना, अक्स से रूठकर खड़ा हुआ.... सुंदर कल्पना, बेहतरीन अभिव्यक्ति
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
जी नमस्ते,
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना शुक्रवार ११ मार्च २०२२ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
माफ कीजिये श्वेता जी मेने अभी ये संदेश देखा ।आपका बहुत बहुत शुक्रिया।
ReplyDeleteजज़्बाती होकर
ReplyDeleteलिए थे कुछ फैसले
बिना तालिम
दिल आगे बढ़ चला था
–ऐसा कैसे हुआ.. विचारणीय
शुक्रिया
Deleteसुन्दर सृजन ।
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteवो मेरा ही आईना था
ReplyDeleteजो मेरे अक्स से
रूठ के खड़ा था
वाह!!!
शुक्रिया
Deleteबहुत खूब कहा।
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteआईना, अक्स से रूठकर खड़ा हुआ....
ReplyDeleteसुंदर कल्पना, बेहतरीन अभिव्यक्ति
शुक्रिया
Deleteशुक्रिया
ReplyDelete