Sunday, March 27, 2022

कविता

जब दिल करे पास आना, जब मन करे दूर जाना
यही सिलसिला है मेरी कहानी का 
उसकी चौखट मेरा अफसाना
दूर तलक हर शाम को डूबते सूरज के साथ
सोचा था बैठेगे कभी झील के किनारे
नारंगी रंग में धुले बादलों के साथ
तुम गैर हुए कोई बात नहीं 
दूर हो मुझसे मेरे पास नहीं
फिर भी एक आहट है दिलमे
तेरे मेरे होने के पास
कोशिश है करना ही होगा
दर्द के टुकड़ों को सीनाही होगा
मुस्कुरा कर जिंदगी को मेरी 
बिन तेरे अब जीना ही होगा~priyaankakhare

Thursday, March 10, 2022

कविता

वक़्त की राह ,वक़्त की चाह 
वक़्त की एहमियत बतला जाती है 
जब वक़्त कम ,लंबे रास्ते , 
मंजिले दूरतलक आकाशमय प्रतीत हो जाती है
फिर से चलो इस वक़्त को थाम लेते है
कुछ वक़्त के लिए ही सही
 सबको अलविदा कहते है।
Priyaanka khare

अल्फाज़

मोहब्बतें तो कई मिली , न मिली तो इमरोज़ सी मोहब्बत न मिली~priyaankakhare

कविता

जब जब सोचा   आखिरी है इम्तिहान अब ।  मुस्कुराकर मालिक ने कहा   खाली जो है  बैठा  दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...