वक़्त की राह ,वक़्त की चाह
वक़्त की एहमियत बतला जाती है
जब वक़्त कम ,लंबे रास्ते ,
मंजिले दूरतलक आकाशमय प्रतीत हो जाती है
फिर से चलो इस वक़्त को थाम लेते है
कुछ वक़्त के लिए ही सही
सबको अलविदा कहते है।
Priyaanka khare
जब जब सोचा आखिरी है इम्तिहान अब । मुस्कुराकर मालिक ने कहा खाली जो है बैठा दिमाग उसका शैतान है उठ चल , लगा दिमाग के घोड़े कस ले चंचल म...
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 16 मार्च 2022 को लिंक की जाएगी ....
ReplyDeletehttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !
अथ स्वागतम् शुभ स्वागतम्
शुक्रिया पम्मी जी
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