Sunday, March 27, 2022

कविता

जब दिल करे पास आना, जब मन करे दूर जाना
यही सिलसिला है मेरी कहानी का 
उसकी चौखट मेरा अफसाना
दूर तलक हर शाम को डूबते सूरज के साथ
सोचा था बैठेगे कभी झील के किनारे
नारंगी रंग में धुले बादलों के साथ
तुम गैर हुए कोई बात नहीं 
दूर हो मुझसे मेरे पास नहीं
फिर भी एक आहट है दिलमे
तेरे मेरे होने के पास
कोशिश है करना ही होगा
दर्द के टुकड़ों को सीनाही होगा
मुस्कुरा कर जिंदगी को मेरी 
बिन तेरे अब जीना ही होगा~priyaankakhare

9 comments:

  1. मुस्कुराना इसलिए क्योंकि दिल की गहराई में सभी के एक प्यारी सी मुस्कान छिपी है

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    1. जी बिल्कुल अनिता जी

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  2. बहुत बहुत शुक्रिया दीदी

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  3. सोचों की तकली से,
    आहों के कपास थामे,
    काते हैं हमने,
    आँसूओं के धागे ..
    टुकड़ों को दर्द के,
    सीने के वास्ते .. बस यूँ ही ...

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  4. सुन्दर रचना

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